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नकली खाद पर सख्त कार्रवाई की मांग, 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन: भारतीय किसान संघ

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, फसल बीमा, खाद की गुणवत्ता, निर्बाध बिजली और धान गबन मामलों में भी उठाई आवाज

कवर्धा, 14 जुलाई। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ जिले में नकली खाद और खाद की कालाबाजारी का मुद्दा गरमा गया है। भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को कलेक्टर से मुलाकात कर किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर पांच सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। संघ ने जिले में नकली खाद की बिक्री पर गहरी चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

भारतीय किसान संघ के जिला अध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने कहा कि खरीफ सीजन में किसान अपनी मेहनत की कमाई से महंगे दामों पर खाद खरीद रहे हैं, लेकिन बाजार में नकली खाद बेचे जाने से फसल को लाभ नहीं मिल रहा है। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में असली कंपनियों की बोरियों में मार्बल पाउडर, नमक, बालू तथा अन्य घटिया सामग्री भरकर नकली खाद बेची जा रही है। इससे न केवल किसानों की फसलें प्रभावित हो रही हैं, बल्कि खेतों की उर्वरा शक्ति भी लगातार घट रही है।

संघ ने प्रशासन से मांग की कि नकली खाद बेचने वालों के स्रोतों का पता लगाया जाए, यह जांच हो कि नकली खाद कहां से आ रही है और किन लोगों द्वारा इसकी आपूर्ति की जा रही है। साथ ही नकली खाद बेचने वाले दुकानदारों के लाइसेंस तत्काल निरस्त किए जाएं तथा संबंधित कंपनियों और डीलरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

ज्ञापन में रखीं पांच प्रमुख मांगें

भारतीय किसान संघ ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में पांच प्रमुख मांगें रखीं—

जिले में नकली खाद की बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

निजी कृषि केंद्रों एवं सहकारी समितियों में खाद के नमूनों की नियमित जांच कर गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

पिछले खरीफ एवं रबी सीजन की फसल बीमा क्षतिपूर्ति राशि किसानों को शीघ्र दिलाई जाए।

किसानों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बिजली लाइनों का मेंटेनेंस कार्य तेजी से कराया जाए।

सेवा सहकारी समितियों में धान गबन के मामलों में दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

भारतीय किसान संघ ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायतों के बावजूद निजी कृषि केंद्रों में अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों और नकली खाद के कारोबारियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। सहकारी समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं होने से किसान मजबूरी में खुले बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदने को विवश हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नकली खाद में मिलाए जाने वाले हानिकारक तत्व फसलों के विकास को प्रभावित करते हैं। इससे उत्पादन घटता है, किसानों को आर्थिक नुकसान होता है और खेतों की प्राकृतिक उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से किसानों के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र और प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि यदि निर्धारित समयावधि में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो जिलेभर के किसान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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