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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद श्री चंद्रशेखर आजाद जी एवम शहीद श्री लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की जयंती मनाई गई – नींलु चंद्रवंशी

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शहीद श्री चंद्रशेखर आजाद जी एवम शहीद श्री लोकमान्य बालगंगाधर तिलक जी की जयंती मनाई गई – नींलु चंद्रवंशी

कवर्धा;- जिला कांग्रेस कमिटी के तत्वाधान में जिलाध्यक्ष नीलू चंद्रवंशी के नेतृत्व में शहीद श्री चंद्रशेखर आजाद एवम शहीद बालगंगाधर तिलक जी की जयंती आज शनिवार 23.07.2022को कांग्रेस भवन कवर्धा में मनाई गई। सर्वप्रथम सभी कांग्रेसियों ने दोनो महान विभूतियों की चलचित्र पर माल्यार्पण कर, तिलक लगाकर उन्हें याद किया। तत्पश्चात नीलू चंद्रवंशी ने सभा को संबोधित करते हुए उनके जीवनी को याद किया और कहा कि चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के भावरा में हुआ था. 1921 में ही चंद्रशेखर आज़ाद सुचारू रूप से आज़ादी की लड़ाई में कूद गए थे. आज़ाद बाद में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के मेंबर भी बन गए, काकोरी कांड समेत अंग्रेज़ों को मात देने वाली कई अन्य गतिविधियों में चंद्रशेखर आज़ाद की अहम भूमिका थी. 27 फरवरी, 1931 को जब अंग्रेज़ चंद्रशेखर आज़ाद को ढूंढ रहे थे, तब उन्होंने खुद को गोली मार ली थी क्योंकि उनका प्रण था कि अंग्रेज़ कभी उन्हें ज़िंदा नहीं पकड़ पाएंगे.

बाल गंगाधर तिलक एक स्वतंत्रता सेनानी और शिक्षक थे. वह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रवर्तकों में से एक थे, यही वजह है कि उनका नाम स्वतंत्रता संग्राम का पर्याय बन गया है. उन्होंने हमेशा स्वराज का मुद्दा उठाया जिसका अर्थ है पूर्ण स्वतंत्रता और एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन की आवश्यकता.

23 जुलाई, 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में जन्मे तिलक वह व्यक्ति थे जिन्होंने देश की आजादी की यात्रा को कई तरह से आकार देने में मदद की. उन्हें आमतौर पर लोकमान्य कहा जाता है जबकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी उन्हें ‘आधुनिक भारत का निर्माता’ मानते थे.

बाल गंगाधर तिलक स्वराज के प्रबल समर्थक थे. उनका एक लंबा राजनीतिक करियर था और इस दौरान उन्होंने भारतीय स्वायत्तता और ब्रिटिश कोलोनियल शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की आवश्यकता पर जोर दिया. अपने मजबूत विचारों के कारण उन्हें एक कट्टरपंथी राष्ट्रवादी माना जाता था.

उन्होने आजादी से पहले केसरी और महरत्ता जैसे साप्ताहिक समाचार पत्रों की शुरुआत की थी. केसरी मराठी भाषा में था जबकि महारत्ता अंग्रेजी भाषा का साप्ताहिक था. स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उनके विचारों और दृष्टिकोण के लिए अंग्रेज तिलक को ‘भारतीय अशांति का जनक’ कहते थे.

कार्यक्रम को श्री ईश्वर शरण वैष्णव, मोहित महेश्वरी,मुकेश झारिया, मुकुंद माधव कश्यप,बाल्मिकी वर्मा,जलेश्वर राजपूत, प्रशांत परिहार, गिरीश चंद्रवंशी, ने भी संबोधित किया एवम आभार प्रदर्शन राजा द्विवेदी जी ने किया।

उक्त कार्यक्रम में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नीलू चंद्रवंशी,गणेश योगी जी, ईश्वर शरण वैष्णव, मुकुंद माधव कश्यप,मोहित महेश्वरी,मुकेश झारिया,चुनवा खान,सुशील चंद्रवंशी,गिरीश चंद्रवंशी, टीकम शर्मा, राजा दिवेदी,तुकेश्वर साहू, महेंद्र कौशिक,पंचराम कौशिक, रामफल कौशिक,जलेश्वर राजपूत,जलेश यादव, प्रसांत परिहार, संतोष भारद्वाज,बाल्मिकी वर्मा, विनोद अग्रवाल,कृष्णा कुमार नामदेव,बाबा खान,अरुण जोशी, पदुम सेन,सूर्यप्रकास चंद्रवंशी, अग्रदाश राय,सुखदास पटेल,नंदराम पाटिल,कपिल श्रीवास,विजय बाचकर, परमेश्वर धीतलहरे,सरजू राम मरावी,सहित पदाधिकारी एवम कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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