सफलता की कहानी: स्टेयरिंग ने बदली जिंदगी, पुनर्वासित युवा आत्मनिर्भरता की राह पर

रायपुर, 6 जुलाई 2026। कभी भय और अनिश्चितता के माहौल में जीवन बिताने वाले सुकमा जिले के कई युवाओं के लिए अब नई शुरुआत का दौर है। छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास पहल और जिला प्रशासन के प्रयासों से ये युवा कौशल प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अब उनके हाथों में रोजगार और सम्मानजनक भविष्य की नई उम्मीद है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) द्वारा पुनर्वासित युवाओं के लिए 30 दिवसीय एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। 13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस प्रशिक्षण में 31 युवा भाग ले रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को वाहन संचालन के साथ-साथ सड़क सुरक्षा, यातायात नियम, रोड संकेतों की जानकारी और वाहन की सामान्य मरम्मत का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिला प्रशासन सभी प्रतिभागियों का ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा रहा है, ताकि उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रही सोड़ी सोमड़ी ने बताया कि यहां सुरक्षित तरीके से वाहन चलाना सिखाया जा रहा है। इससे उन्हें आत्मविश्वास मिला है और अब वे सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए तैयार हैं। वहीं पुनेम ज्योति ने कहा कि ड्राइविंग सीखने के बाद वे रोजगार प्राप्त कर अपने परिवार की जिम्मेदारियां बेहतर ढंग से निभा सकेंगी।
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। कौशल विकास, ड्राइविंग प्रशिक्षण और लाइसेंस जैसी सुविधाओं के माध्यम से युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
यह पहल दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है। सुकमा के ये युवा अब आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करने की ओर बढ़ रहे हैं और अपने परिवार के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं।


