मलेरिया रोकथाम के लिए वनांचलों में स्वास्थ्य विभाग का विशेष अभियान, संवेदनशील क्षेत्रों का किया निरीक्षण

रायपुर, 3 अगस्त। वर्षा ऋतु में मलेरिया और अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने संवेदनशील वनांचल क्षेत्रों में निगरानी और नियंत्रण गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में राज्य स्तरीय अधिकारियों ने बिलासपुर जिले के कोटा और मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड के दूरस्थ वन क्षेत्रों का मैदानी निरीक्षण कर तैयारियों का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान अचानकमार, कोटा और अन्य वन बस्तियों में संचालित मलेरिया नियंत्रण गतिविधियों का मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों ने कहा कि जंगलों में रहने वाले परिवारों तक भी नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि कोई भी व्यक्ति समय पर जांच और उपचार से वंचित न रहे।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने जिला अमले को सभी वन बस्तियों में शत-प्रतिशत सक्रिय मलेरिया सर्विलांस, प्रत्येक परिवार की लाइन लिस्टिंग, रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (आरडीटी) किट और मलेरिया रोधी दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही संदिग्ध मरीजों की तत्काल जांच और उपचार तथा संभावित संक्रमण वाले क्षेत्रों की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
निरीक्षण के दौरान संभागीय संयुक्त संचालक डॉ. गायत्री बांधी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मुंगेली डॉ. शीला शाह, उप संचालक वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉ. वी.आर. भगत तथा संबंधित जिलों के जिला मलेरिया अधिकारियों ने क्षेत्र में संचालित गतिविधियों की समीक्षा की।
अधिकारियों ने जिला और विकासखंड स्तर पर गठित रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) को 24×7 अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए। साथ ही कहा गया कि किसी भी क्षेत्र से मलेरिया क्लस्टर या संभावित प्रकोप की सूचना मिलने पर 24 घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुंचकर नियंत्रण और रोकथाम की कार्रवाई शुरू करे।
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वर्षा ऋतु में मलेरिया के प्रत्येक संभावित मामले पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभाग का उद्देश्य दूरस्थ वन क्षेत्रों सहित पूरे प्रदेश में समय पर जांच, उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। विशेष रूप से बुखार से पीड़ित बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जांच और उपचार को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

