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भोरमदेव जंगल सफारी का सीक्रेट आगाज़ : वन विभाग की सुस्ती या कमियों को छिपाने की बड़ी साजिश ? सुबह 8 बजे की खानापूर्ति पर उठे सवाल, विधायक भावना बोहरा का नाम गायब

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भोरमदेव जंगल सफारी का सीक्रेट आगाज़ : वन विभाग की सुस्ती या कमियों को छिपाने की बड़ी साजिश ? सुबह 8 बजे की खानापूर्ति पर उठे सवाल, विधायक भावना बोहरा का नाम गायब

कवर्धा। कबीरधाम जिला, जिसे छत्तीसगढ़ का खजुराहो कहा जाता है, अपनी नैसर्गिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए विश्व विख्यात है। इसी वैभव में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है— ‘भोरमदेव जंगल सफारी’। लेकिन, इसके शुभारंभ की प्रक्रिया ने वन विभाग की मंशा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुभमूर्त या केवल खानापूर्ति?

हैरानी की बात यह है कि जिले के इतने बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का शुभारंभ कल यानी 3 मई, रविवार को सुबह ठीक 8:00 बजे रखा गया है। आम तौर पर सरकारी आयोजनों और पर्यटन केंद्रों के उद्घाटन जन-भागीदारी बढ़ाने के लिए दोपहर या शाम को रखे जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक लोग साक्षी बन सकें। सुबह 8 बजे का समय यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या विभाग वास्तव में जनता को जोड़ना चाहता है या फिर महज कागजी कोरम पूरा करने की जल्दबाजी में है?

आमंत्रण पत्र में पंडरिया विधायक भावना बोहरा का नाम तक नहीं

वहीं जंगल सफारी के उद्घाटन के लिए छपे आमंत्रण पत्र में पंडरिया विधायक भावना बोहरा का नाम शामिल नहीं होने से नाराजगी और सवाल दोनों खड़े हो गए हैं।आमंत्रण पत्र में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप और सांसद संतोष पांडेय सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के नाम तो प्रमुखता से दर्ज हैं, लेकिन उसी जिले की विधायक का नाम गायब होना चर्चा का विषय बन गया है।इसे केवल एक चूक मानने के बजाय स्थानीय लोग इसे जनप्रतिनिधि के अपमान और पंडरिया विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा के रूप में देख रहे हैं।राजनीतिक हलकों में यह मामला और भी तूल पकड़ता दिख रहा है, खासकर उस समय जब महिलाओं के सम्मान और भागीदारी को लेकर लगातार राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। ऐसे में एक महिला विधायक की अनदेखी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। अब यह लापरवाही है या जानबूझकर किया गया कृत्य—यह जांच का विषय बन गया है।

अंतिम क्षणों में सूचना : प्रचार-प्रसार से परहेज क्यों?

कल उद्घाटन है और आज 7 बजे शाम ढले सूचना जारी की जा रही है। महज कुछ घंटों पहले मिली इस जानकारी ने वन मंडल और डीएफओ की कार्यशैली को चर्चा का विषय बना दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या वन विभाग किसी संभावित कमी को छिपाने की कोशिश कर रहा है? या फिर विभाग को डर है कि आम जनता की मौजूदगी में उनकी अव्यवस्थाओं की पोल खुल जाएगी? बिना उचित प्रचार-प्रसार के इतने बड़े आयोजन की सफलता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

दिग्गजों की मौजूदगी, विभाग की सुस्ती

कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप जैसे कद्दावर नेता शिरकत कर रहे हैं। मंत्रियों की गरिमामयी उपस्थिति के बावजूद, जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र का फेल होना वन विभाग की लापरवाही को दर्शाता है। क्या विभाग केवल ‘झूठी वाहवाही’ लूटने के लिए आनन-फानन में यह आयोजन कर रहा है?

कैसे सफल होगा सफारी का सफर?

भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य का यह सफारी प्रोजेक्ट कबीरधाम के पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता था। लेकिन जिस तरह से इसके शुभारंभ को ‘सीक्रेट मिशन’ की तरह अंजाम दिया जा रहा है, उससे पर्यटकों और स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। स्थानीय जनों का कहना है कि अगर विभाग की नीयत साफ होती, तो हफ़्तों पहले इसका व्यापक प्रचार किया जाता।

अब देखना यह होगा कि सुबह 8 बजे की यह ‘जल्दबाजी’ भोरमदेव सफारी के भविष्य के लिए शुभ संकेत लाती है या फिर यह विभाग की एक और ‘खानापूर्ति’ वाली फाइल बनकर रह जाएगी।

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