धमतरी में 357 जल स्रोतों पर बनेंगे सैंड फिल्टर, भू-जल संरक्षण को मिलेगी नई दिशा

धमतरी में 357 जल स्रोतों पर बनेंगे सैंड फिल्टर, भू-जल संरक्षण को मिलेगी नई दिशा
रायपुर, 3 अगस्त। जल संरक्षण और भू-जल संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए धमतरी जिला प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। जिले के 357 जल स्रोतों पर सैंड फिल्टर निर्माण के लिए 185.64 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
इस पहल का उद्देश्य वर्षा जल का वैज्ञानिक प्रबंधन, जल स्रोतों की गुणवत्ता बनाए रखना और भू-जल पुनर्भरण को मजबूत करना है। स्वीकृत कार्यों का क्रियान्वयन संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से समय-सीमा में किया जाएगा।
चार विकासखंडों में होंगे निर्माण कार्य
प्रशासन के अनुसार जिले के विभिन्न विकासखंडों में सैंड फिल्टर का निर्माण किया जाएगा। इनमें—
- कुरूद विकासखंड में 124
- नगरी विकासखंड में 107
- धमतरी विकासखंड में 78
- मगरलोड विकासखंड में 48
सैंड फिल्टर शामिल हैं।
वैज्ञानिक तकनीक से सुधरेगी जल गुणवत्ता
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि सैंड फिल्टर जल संरक्षण की प्रभावी वैज्ञानिक तकनीक है। तालाब, कुएं और जलाशयों के समीप इनके निर्माण से वर्षा जल के साथ बहकर आने वाली मिट्टी, गाद, प्लास्टिक और अन्य कचरा प्राकृतिक रूप से छन जाता है।
इससे जल स्रोतों में गाद जमा होने की समस्या कम होगी, पानी की गुणवत्ता बेहतर होगी और भू-जल पुनर्भरण की प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा और लगातार बढ़ते जल दोहन के बीच यह व्यवस्था भविष्य में जल संकट से निपटने में सहायक साबित होगी।
ग्रामीण आजीविका को भी मिलेगा लाभ
जिला प्रशासन के अनुसार स्वच्छ और सुरक्षित जल स्रोतों से पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलेगा। जल उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार होने से कृषि, मत्स्य पालन और अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशासन ने ग्राम पंचायतों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जल एवं स्वच्छता समितियों से इन संरचनाओं के नियमित रखरखाव एवं स्वच्छता में सक्रिय भागीदारी की अपील की है।
यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-6 (स्वच्छ जल एवं स्वच्छता) के अनुरूप है। जल संरक्षण को केवल निर्माण कार्य तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी से जोड़कर धमतरी जिले को जल प्रबंधन के क्षेत्र में एक अनुकरणीय मॉडल बनाने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।



