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ग्राम मड़मड़ा मे श्रावण मास आते ही होने लगते हैं धार्मिक आयोजन ।

ग्राम मड़मड़ा मे श्रावण मास आते ही होने लगते हैं धार्मिक आयोजन

AP न्यूज़: इस वर्ष श्रावण मास लगने के एक दिन पूर्व ही गुरू पूर्णिमा के दिन से ही धार्मिक आयोजन प्रारंभ हुवा। ग्राम मड़मड़ा में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर ग्राम के श्रेष्ठजनों ने, बच्चो ने और युवाओं ने एक साथ मिलकर माता सरस्वती का पूजन वंदन किया। गुरू पूर्णिमा के दिन से पूरे श्रावण मास में गोस्वामी श्री तुलसीदास जी के द्वारा रचित श्री रामचरित मानस का मानस मंडलियों के द्वारा नित्य पाठ होता है । इस धार्मिक आयोजन में ग्राम मड़मड़ा के साथ, छाटा, सिरमी और अन्य पड़ोसी गावों के श्रेष्ठजनों की भागीदारी रहती हैं।
13 जुलाई को रात्रि 7 बजे से 1 बजे तक ग्राम में श्री रामचंद्र जी कथा का गुड़ गान हुवा ।

धार्मिक आयोजनों को कराने में श्री अवध राम जायसवाल की मुख्य भूमिका रहती हैं।

प्रत्येक वर्ष की भाती इस वर्ष भी श्रावण मास एवम गुरु पूर्णिमा के अवसर पर धार्मिक धार्मिक आयोजन करवाने में श्री अवध राम जायसवाल की मुख्य भूमिका रहीं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर राम चरित मानस के आयोजन में श्री अवध राम जायसवाल ने ही भगवान श्री राम चंद्र जी की कथा का सुभारंभ किया और संचालन भी किया । अवधराम जायसवाल के साथ साथ अन्य ग्राम वासियों ने आयोजन करवाने में भूमिका निभाई। रामभजन झरिया (संगीतकार), आजूराम जायसवाल , मनोज जायसवाल, राजकुमार यादव(तबलावदक) , चोवाराम, अगमदास, सुभाष जायसवाल , बंटी मनिकपुरी , मनबहल साहू(सिर्मी से), राहुल जायसवाल, बलराम जायसवाल, ओमकार जायसवाल, आयुस,विजय धुर्वे, कैलाश दास, के साथ साथ अन्य सहायक थे जिन्होंने क्रायक्रम में मुख्य भूमिका निभाई।

श्रावण मास के पहले दिन ब्रम्हमूहर्त में रामधुनी के साथ ग्रामीण देवी देवताओं का पूजन अर्चन एवम श्री फल भेट का भी आयोजन हुवा ।

सुबह 4 बजे से स्नान करकर महामाया मंदिर के प्रांगण में उपस्थित होकर ग्रामीण देवी देवताओं से निष्काम मन से सेवा करने के लिए ग्रामवासी एकसाथ इकट्ठे होकर रामधूनी में शमिल हुवे। सर्वप्रथम ग्राम के ठाकुर देव महराज की सेवा करके नागा बाबा मंदिर की सेवा करके महामाया मंदिर की सेवा करके भगवान बाबा भोलेनाथ की सेवा की और अन्य देवी देवताओं की भी सेवा की।
ग्राम मड़मड़ा में लगातार कई वर्षो से रामधुनी नित्य प्रातः काल में होती हैं लेकिन सावन के पहले दिन में यह बड़े पर्व के रूप में मनाया गया। प्रातः ग्रामीण देवी देवताओं की स्तुति में ग्राम के समस्त श्रेष्ठ जनों की भागीदारी रहीं। जिनमे लखन वर्मा (पूर्व सरपंच),रामकुसल वर्मा, बलराम सिंह ठाकुर, रमेश वर्मा , फूलचंद जायसवाल, मोलुराम जायसवाल , रत्नाकर ठाकुर, ईश्वरी जायसवाल एवम अन्य ग्रामवासियों ने मुख्य भूमिका निभाई।

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