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सहकार से समृद्धि छत्तीसगढ़ में खुशहाली का नया मार्ग

विशेष लेख

धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक)

अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी)

रायपुर, 15 मई 2026/ छत्तीसगढ़ में सहकारिता आंदोलन राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो अब ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ विकास के एक नए और आधुनिक ढांचे में बदल रहा है। विष्णुदेव साय सरकार के नेतृत्व में सहकारी समितियों को मजबूत कर ग्रामीण विकास और किसान सशक्तिकरण को नई गति दी जा रही है। एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना। सहकारिता के इस शाश्वत मंत्र को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सहकार से समृद्धि विजन ने आज भारत के ग्रामीण और शहरी परिदृश्य में एक नई क्रांति का आधार बना दिया है। धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में यह संकल्प आज एक आर्थिक संबल बनकर उभर रहा है। यह मात्र एक व्यवस्था नहीं, बल्कि अंत्योदय की वह भावना है जहाँ समाज का अंतिम व्यक्ति विकास की मुख्यधारा से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहा है।

सहकारिता विकास का आधुनिक ढांचा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप के कुशल मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ ने सहकारिता के दायरे को केवल कृषि तक सीमित न रखकर इसे व्यापार और सेवा क्षेत्र का प्रमुख स्तंभ बना दिया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की संकल्पनाओं को धरातल पर उतारते हुए राज्य के सहकारी ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार किया गया है।

समृद्धि के प्रमुख आधार क्रांतिकारी कदम सहकारिता के माध्यम से खुशहाली सुनिश्चित करने हेतु निम्नलिखित प्रयास किए जा रहे हैं। 515 नवीन पैक्स (PACS) का गठन सहकारी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए राज्य में 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों का गठन किया गया है। अब राज्य में कुल पैक्स समितियों की संख्या 2 हजार 573 हो गई है। ये समितियाँ अब केवल ऋण वितरण नहीं, बल्कि बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में कार्य कर रही हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा

इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को खाद-बीज के साथ-साथ जन औषधि केंद्र, उर्वरक वितरण और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) जैसी सुविधाएं सीधे उनके गांव में मिल रही हैं। विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना के तहत किसान अब अपनी उपज का स्थानीय स्तर पर सुरक्षित भंडारण कर सकेंगे। इससे उन्हें फसल को कम दामों पर बेचने की मजबूरी से मुक्ति मिलेगी। महिला और युवा सशक्तिकरण को बढावा देने दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन के क्षेत्र में सहकारी समितियों के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को उद्यमिता से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा रही है।

तकनीक, पारदर्शिता और सुशासन सहकारिता में स्व से ऊपर सर्व के कल्याण की भावना निहित है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दिया है। समितियों के कंप्यूटरीकरण से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और हर लेनदेन पारदर्शी हुआ है। ई-मार्केटप्लेस के माध्यम से स्थानीय सहकारी उत्पादों को अब राष्ट्रीय और वैश्विक मंच प्राप्त हो रहा है।

विकसित छत्तीसगढ़ – विकसित भारत सहकार से समृद्धि केवल एक नारा नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों, महिलाओं और युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला एक जीवंत अभियान है। जब हमारे गांव के पैक्स केंद्र सशक्त होंगे, तभी राष्ट्र समृद्ध होगा। जुड़िए सहकारिता से, बढ़िए समृद्धि की ओर की पहल के साथ छत्तीसगढ़ आज विकास के ऐसे मॉडल की ओर अग्रसर है, जहाँ सामूहिक सहयोग ही प्रत्येक व्यक्ति की प्रगति का आधार है। "छत्तीसगढ़ में सहकारिता केवल ऋण वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आधार है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' के संकल्प को आत्मसात करते हुए हमारी सरकार प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमने सहकारी समितियों (पैक्स) को बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में विकसित किया है, ताकि किसान और ग्रामीण महिलाओं को उनके गांव के समीप ही खाद-बीज के साथ-साथ बैंकिंग, स्वास्थ्य और तकनीकी सुविधाएँ मिल सकें। जब हमारा गांव और वहां का सहकारी तंत्र मजबूत होगा, तभी हम 'विकसित छत्तीसगढ़' और 'विकसित भारत' के स्वप्न को साकार कर पाएंगे।"

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