पेसा और वन अधिकार कानून के बेहतर क्रियान्वयन पर सरकार का फोकस, मुख्यमंत्री साय ने बनाई नई कार्ययोजना

रायपुर । मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में बुधवार को महानदी मंत्रालय में वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) और पेसा कानून (पीईएसए) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स की पहली बैठक हुई। बैठक में अनुसूचित क्षेत्रों में दोनों कानूनों के बेहतर समन्वय, ग्राम स्वशासन को मजबूत करने और जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लगभग एक-तिहाई आबादी आदिवासी समाज से जुड़ी है। ऐसे में पेसा कानून और वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दोनों कानूनों के प्रावधानों का समन्वित तरीके से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
बैठक में पेसा नियम-2022 के क्रियान्वयन, वन अधिकार अधिनियम के तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक दावों की स्थिति, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार (सीएफआरआर) और वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों के नियमों और प्रक्रियाओं में समन्वय के लिए राज्य स्तरीय कार्ययोजना समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति विभागों के बीच अभिसरण सुनिश्चित करेगी और समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर उसके क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।
उन्होंने जिला स्तर पर पेसा निगरानी समितियों को भी सक्रिय करने के निर्देश दिए, ताकि ग्राम सभाओं को सशक्त बनाया जा सके और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित हो। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने और पेसा कानून से जुड़े भ्रम दूर करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, विधायक नीलकंठ नेताम, मुख्य सचिव विकासशील सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

