तीजन बाई के नाम पर शुरू होगा लोककला अलंकरण, 70 दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बानबरद में पंडवानी महासम्मेलन को किया संबोधित, गनियारी को कला ग्राम बनाने और बानबरद मिडिल स्कूल को हाईस्कूल में उन्नत करने की घोषणा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस के अवसर पर शनिवार को दुर्ग जिले के अहिवारा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई की स्मृतियों को चिरस्थायी बनाने के लिए कई घोषणाएं कीं। उन्होंने तीजन बाई के नाम पर इसी वर्ष से लोककला अलंकरण शुरू करने, उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित करने तथा महासम्मेलन में शामिल 70 लोककला दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बानबरद मिडिल स्कूल का हाईस्कूल में उन्नयन करने और अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड बनाने की भी घोषणा की।
लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ लोककला और संस्कृति की समृद्ध धरती है। यहां की लोककलाएं प्रदेश के इतिहास, जीवन-मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनका संरक्षण करना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ कलाकारों को प्रोत्साहित करने और उन्हें व्यापक मंच उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने प्रदेशभर से पहुंचे लोक कलाकारों का अभिनंदन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की माटी ने अनेक महान कलाकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी प्रतिभा और साधना से प्रदेश की संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाई है।
तीजन बाई के नाम पर मिलेगा लोककला अलंकरण
मुख्यमंत्री ने पंडवानी की महान कलाकार पद्म विभूषण तीजन बाई का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अद्वितीय कला-साधना से छत्तीसगढ़ की पंडवानी को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया। पंडवानी ऐसी अनूठी लोकविधा है, जिसमें कलाकार गायन, अभिनय और भाव-भंगिमाओं के माध्यम से महाभारत की कथा तथा उसके पात्रों को जीवंत कर देता है।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई ने इस लोकविधा को देश-विदेश के अनेक मंचों तक पहुंचाकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनकी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए उनके गृह ग्राम गनियारी को कला ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही, वहां के हाईस्कूल का नामकरण भी उनके नाम पर करने की पहल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि तीजन बाई के नाम पर लोककला अलंकरण इसी वर्ष राज्योत्सव के अवसर पर प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उनकी कला-साधना के प्रति आदर व्यक्त करने के साथ प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों को भी अपनी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।
70 लोककला दलों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री साय ने आयोजकों की मांग पर पंडवानी महासम्मेलन में शामिल 70 लोककला दलों को 25-25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इनमें पंडवानी कलाकारों के साथ चार पंथी और तीन आदिवासी नृत्य दल भी शामिल हैं। इस पहल से लोक कलाकारों को आर्थिक संबल मिलने के साथ पारंपरिक कला विधाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बानबरद में शिक्षा और सड़क विकास को मिलेगी गति
क्षेत्रीय विकास से जुड़ी घोषणाओं में मुख्यमंत्री ने मिडिल स्कूल बानबरद को हाईस्कूल में उन्नत करने की घोषणा की। इसके अलावा अहिवारा रेलवे क्रॉसिंग से अटल परिसर तक बीटी रोड का निर्माण कराया जाएगा। इन घोषणाओं से क्षेत्र में शिक्षा सुविधाओं के विस्तार और आवागमन को बेहतर बनाने की उम्मीद है।
46 वर्षों से लोककला संरक्षण में जुटा ज्ञानश्रोत कला मंच
मुख्यमंत्री ने ज्ञानश्रोत कला मंच के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था का लगातार 46 वर्षों तक लोककला और संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य करना बड़ी उपलब्धि है। मंच ने कलाकारों को अवसर देने, लोककलाओं को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने पद्मश्री डॉ. उषा बारले और ज्ञानश्रोत लोककला मंच से जुड़े सभी लोगों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को बढ़ावा देने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ी सिनेमा और स्थानीय कलाकारों के लिए भी नए अवसर तैयार कर रही है। इसके लिए छत्तीसगढ़ फिल्म विकास बोर्ड का गठन किया गया है। नवा रायपुर में फिल्म सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और प्रदेश के कलाकारों एवं युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
लोककलाएं छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक आत्मा : गजेन्द्र यादव
कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने में यहां के कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पंडवानी, पंथी, भरथरी, ददरिया और सुवा जैसी लोकविधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक आत्मा हैं। ये केवल गीत और नृत्य नहीं, बल्कि यहां की जीवनशैली और सामाजिक परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं।
उन्होंने कलाकारों से महासम्मेलन की परंपरा को आगे भी उत्साह के साथ जारी रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम को विधायक रिकेश सेन ने भी संबोधित किया। पद्मश्री डॉ. उषा बारले ने स्वागत उद्बोधन में कलाकारों से जुड़ी विभिन्न मांगों को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।
इस अवसर पर दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर, साजा विधायक ईश्वर साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोक कलाकार और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।




