डबरी निर्माण से बदली बस्तर के किसान सोनधर की तकदीर

जल संरक्षण बना समृद्धि का आधार, सिंचाई के साथ मछली पालन से बढ़ी आय

वीबी-जी मिशन से खेती, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा

रायपुर, 14 जुलाई। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के तहत जल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को नई मजबूती मिल रही है। बस्तर जिले के बकावंड विकासखंड की ग्राम पंचायत खोटलापाल में योजना के अंतर्गत निर्मित डबरी (छोटे तालाब) ने किसान सोनधर के जीवन में बड़ा बदलाव ला दिया है। जल संरक्षण के इस मॉडल ने न केवल सिंचाई की समस्या दूर की, बल्कि अतिरिक्त आय के नए रास्ते भी खोल दिए हैं।
अब सालभर मिल रही सिंचाई, बढ़ा फसल उत्पादन
किसान सोनधर ने बताया कि पहले वर्षा का अधिकांश पानी बह जाता था, जिससे गर्मी के मौसम में सिंचाई के लिए पानी का गंभीर संकट रहता था। डबरी बनने के बाद वर्षा जल का प्रभावी संचयन होने लगा है और अब खेतों को समय पर पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध हो रही है। इसके चलते वे अब साल में अतिरिक्त फसलें लेने में सक्षम हो गए हैं। साथ ही पशुपालन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
मछली पालन बना अतिरिक्त आय का जरिया
डबरी ने केवल सिंचाई की समस्या का समाधान नहीं किया, बल्कि आजीविका का नया साधन भी उपलब्ध कराया है। सोनधर अब डबरी में सफलतापूर्वक मछली पालन कर रहे हैं, जिससे उनके परिवार की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भविष्य में वे बतख पालन शुरू करने की भी योजना बना रहे हैं, जिससे आमदनी के स्रोत और बढ़ेंगे।
भूजल स्तर सुधरा, गांव को भी मिला लाभ
डबरी निर्माण का लाभ पूरे क्षेत्र को मिला है। इससे आसपास का भूजल स्तर बढ़ा है, जिसके कारण निकटवर्ती कुओं और हैंडपंपों में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई है। खेतों में नमी बनी रहने से आसपास के किसानों की फसलों को भी लाभ मिल रहा है।
ग्रामीणों को मिला स्थानीय रोजगार
डबरी निर्माण कार्य के दौरान ग्राम पंचायत के जॉब कार्डधारी श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मिला। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े और मजदूरी के लिए पलायन की आवश्यकता कम हुई।
जल संरक्षण से आत्मनिर्भरता की ओर
खोटलापाल का यह मॉडल दर्शाता है कि यदि जल संरक्षण कार्यों को जनभागीदारी और सरकारी योजनाओं के समन्वय से लागू किया जाए तो खेती, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका तीनों को एक साथ सशक्त बनाया जा सकता है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के माध्यम से ऐसे प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और सतत विकास की नई मिसाल बन रहे हैं।




