ChhattisgarhINDIAखास-खबर

छत्तीसगढ़ी साहित्य की अनमोल रत्न है – डाँ.परदेशी राम वर्मा

आलेख – कमलेश प्रसाद शर्माबाबू

छत्तीसगढ़ी साहित्य के आकाश में डाँ.परदेशी राम वर्मा उस ध्रुव तारे के समान है जो साहित्य से कभी अस्त नही हो सकता।उनकी लिखी कालजयी रचनाएं हमेशा आज और कल की पीढ़ी का मार्गदर्शन करती रहेंगी और मील का पत्थर साबित होगी।वे हिन्दी और छत्तीसगढ़ी दोनो भाषाओं में समान अधिकार रखतें हैं।उनकी रचना में एक ऐसा धारा प्रवाह होता है कि पाठक वर्ग उनसे सहज ही जुड़ जाता है। छत्तीसगढ़ी भाषा में उनकी पकड़ उसके मिट्टी से जुड़े हुए साहित्यकार होने का जीता-जागता सबूत है। छत्तीसगढ़ी भाषा ज्ञान उनमें कूट-कूट कर भरा हुआ है।हाना लोकोक्तियां मुहावरों के दर्शन उनके साहित्य में सहज ही हो जाते हैं। चूंकि वे रायपुर संभाग से आते हैं इसलिए उनकी छत्तीसगढ़ी भाषा की रचना में उत्कृष्ट छत्तीसगढ़ी शब्दों का समावेश होता है। राजधानी के आस-पास की भाषा को ही उस राज्य की मानक भाषा कही जाती है इस लिहाज से भी डाँ.परदेशी राम वर्मा की भाषा इस पर पूरी तरह खरी उतरती है।
पचहत्तर वर्षीय डाँ.परदेशी राम वर्मा को छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2003 में पं.रविशंकर शुक्ल वि.वि. द्वारा डाँक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया है।अब तक उनकी सात कथा संग्रह,तीन उपन्यास, एक नाटक,एक बाल काब्य संग्रह,एक बाल कथा संग्रह सहित विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आलेख प्रकाशित हुए हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्वारा छत्तीसगढ़ का शीर्ष सम्मान पं.सुन्दर लाल शर्मा राज्य अलंकरण सम्मान 2013 में प्राप्त हुआ है।
वर्तमान छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रेमचंद के रूप में पहचान बनाने वाले डाक्टर परदेशी राम वर्मा छत्तीसगढ़ी साहित्य के अनमोल रत्न है। छत्तीसगढ़ी साहित्य के प्रति उनके समर्पण को अभी हाल ही में आयोजित विश्व महतारी दिवस पर दिये गये इस वक्तव्य से समझा जा सकता है कि ” जो सरकार मातृभाषा को दरकिनार करेगी और भाषा के संग गद्दारी करेगी वह सरकार खुद सत्ता से बाहर हो जायेगी। छत्तीसगढ़ी भाषा में पढ़ाई-लिखाई के साथ रोजगार व्यवस्था शासन को करनी चाहिए। तभी मातृभाषा समृद्ध हो पायेगी।”
आज छत्तीसगढ़ी भाषा में चल रही उनकी सतत लेखनी छत्तीसगढ़ी साहित्य को एक नई दिशा और पहचान के साथ नई उँचाई प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ी भाषा को समृद्ध करने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है।वे आज किसी परिचय के मोहताज नहीं है क्योंकि सुधि पाठक उनकी रचना को खोज-खोजकर पढ़ते हैं।एक लेखक कवि का सबसे बड़ा सपना होता है लोग उन्हें उनके रचना के आधार पर जाने, इसमें डाँ.परदेशी राम वर्मा अग्रणी हैं ।दसवी से लेकर एम.ए.छत्तीसगढ़ी के पाठ्यक्रम में उनकी रचना पढ़ाई जाती है।वे मृदभाषी और मिलनसार ब्यक्तित्व के धनी है मैं जब भी उनसे मिला हूँ हमेशा मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।माँ शारदा हमेशा उनकी लेखनी को सशक्त बनाये रखें।।
इसी कामना के साथ कमलेश प्रसाद शर्मा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page