बस्तर से हथियारबंद नक्सल आतंक का पूर्ण सफाया ऐतिहासिक और युगांतरकारी उपलब्धि : भाजपा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री शाह एवं मुख्यमंत्री साय को दी बधाई, कहा : ‘डबल इंजन’ सरकार ने सिद्ध किया संकल्प
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने बस्तर में नक्सलवाद के ऐतिहासिक खात्मे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से बधाइयाँ दी हैं। श्री देव ने कहा कि नक्सली आतंक का सफाया भारतीय लोकतंत्र और आंतरिक सुरक्षा के इतिहास में एक ‘युगांतरकारी मोड़’ है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल के दौरान जिस नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया गया था, उसका समूल नाश प्रधानमंत्री श्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल नेतृत्व, सुदृढ़ संकल्प और समयबद्ध रणनीति का परिणाम है। श्री देव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने देश से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की जो समय-सीमा तय की थी, हमारे सुरक्षा बलों और सरकार की प्रतिबद्धता से उसे सिद्ध कर लिया गया। यह चमत्कारिक उपलब्धि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार की ‘डबल इंजन’ कार्यप्रणाली के कारण अर्जित हुई है। इसमें प्रदेश के उपमुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा की सक्रिय व उल्लेखनीय भूमिका रही है, जिन्होंने ज़मीनी स्तर पर रणनीति को अमलीजामा पहनाया। नक्सल प्रभावित इलाकों में प्रदेश सरकार द्वारा अमल में लाई जा रही ‘पुनर्वास से पुनर्जीवन’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि नक्सल कैडरों को आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अंतिम अवसर देने के लिए साय सरकार ने मानवीय और प्रभावी पुनर्वास नीति को मंजूरी दी, जिसे अप्रैल 2025 से लागू किया गया। इसके अभूतपूर्व परिणाम सामने आए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों को तीन वर्षों तक 10 हजार रुपये प्रति माह की सहायता, शहरी क्षेत्रों में 4 डिसमिल प्लॉट या ग्रामीण क्षेत्रों में 1 हेक्टेयर कृषि भूमि, और स्किल डेवलपमेंट का लाभ दिया जा रहा है। पुनर्वास हेतु 15 हजार प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। श्री देव ने कहा कि गाँव के पूरी तरह नक्सल मुक्त होने पर वहाँ 1 करोड़ रुपए के विकास कार्य तत्परता से स्वीकृत किए जा रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने ‘नियद नेल्लानार’ योजना को बुनियादी विकास का सूर्योदय बताते हुए कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा स्थापित किए गए 86 नए सुरक्षा कैंपों की सुरक्षा छतरी के नीचे बस्तर के दुर्गम कोनों तक शासकीय योजनाएँ पहुँची हैं। इन क्षेत्रों में 43 बारहमासी सड़कें, 78 नए मोबाइल टावर, 401 प्राथमिक शालाएं और 516 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। आजादी के 77 वर्ष बाद बीजापुर के चिल्कापल्ली गाँव, तेमेनार, पुसकोंटा और अबूझमाड़ के हांदावाड़ा में पहली बार बिजली पहुँची है। श्री देव ने कहा कि माओवादी कमांडर हिड़मा के पैतृक गाँव ‘पुवर्ती’ में सड़क-बिजली पहुँची और उसकी माँ तक को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है। रेकावया गाँव में आजादी के बाद पहला स्कूल बन रहा है। माओवादी हिंसा के कारण बंद पड़े 50 स्कूलों को दोबारा खोला गया है। सांस्कृतिक और खेल गौरव की चर्चा करते हुए श्री देव ने कहा कि ‘बस्तर ओलंपिक’ के जरिए नक्सल पीड़ित, दिव्यांग और आत्मसमर्पित युवाओं को मंच मिला। ‘बस्तर पण्डुम’ और ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ ने बस्तर की नई, शांतिपूर्ण और समृद्ध वैश्विक पहचान स्थापित की है। श्री देव ने इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्ष 2005 में बीजापुर के करकेली ग्राम से नक्सलियों के आर्थिक शोषण और अत्याचार के खिलाफ ग्रामीणों का स्वस्फूर्त आंदोलन ‘सलवा जुडूम’ (शांति मार्च) शुरू हुआ था, जिसे बाद में स्व. महेंद्र कर्मा ने नेतृत्व दिया और भाजपा सरकार ने संरक्षण प्रदान किया। परंतु, नक्सली समर्थक संगठनों और वामपंथी ‘ओपिनियन मेकर्स’ ने झूठे नैरेटिव गढ़े जबकि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी माना था कि यह आंदोलन नक्सलियों की क्रूरता के विरुद्ध आदिवासियों का स्वाभाविक गुस्सा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ लगाकर इसे बंद करा दिया गया। प्रदेश की साय सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ सहायक सशस्त्र पुलिस बल अधिनियम, 2011’ के तहत डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) का गठन कर स्थानीय युवाओं को वैधानिक ताकत दी, जिसने अंततः इस आतंक को समाप्त किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया और कहा कि छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने माओवादी मूवमेंट को सीधा प्रश्रय दिया था। कांग्रेस का इतिहास हमेशा नक्सल समर्थकों को बढ़ावा देने का रहा है। नक्सल समर्थक जज को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर कांग्रेस ने नक्सल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़कने का कृत्य किया था। झीरम हमले पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिलासपुर में संपादकों के बीच नक्सलियों को क्लीन चिट दी थी, वहीं भूपेश बघेल वर्षों तक झीरम के सबूत अपनी ‘जेब में होने’ का दावा कर जाँच एजेंसियों को भटकाते रहे, लेकिन मुख्यमंत्री रहने के बावजूद कभी साक्ष्य पेश नहीं किए। श्री देव ने कहा कि नक्सलियों का महिमामण्डन करते रहना तो कांग्रेस नेताओं का प्रिय शगल रहा है। काँकेर में जब सुरक्षा बलों ने 29 माओवादियों को मार गिराया, तो भूपेश बघेल ने इसे ‘फर्जी मुठभेड़’ बता दिया। कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने बयान दिया कि ‘सभी नक्सली खराब नहीं होते’ और यूपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राज बब्बर ने माओवादियों को ‘क्रांतिकारी’ कहा था। इसी तरह दुर्दान्त नक्सली हिड़मा के मारे जाने पर दिग्विजय सिंह ने एक संदिग्ध महिला के विलाप वाले पोस्ट को रीपोस्ट कर सुरक्षा बलों पर सवाल उठाए। अभी हाल ही प्रदेश के एक कांग्रेस विधायक ने हिड़मा को अपना रोल मॉडल बताया है। श्री देव ने कहा कि देश में जहाँ भी नक्सलवाद फला-फूला, वहाँ कांग्रेस की सरकारें थीं; चाहे वह अविभाजित मध्य प्रदेश हो, अविभाजित आंध्र प्रदेश हो, महाराष्ट्र हो, या पश्चिम बंगाल का नक्सलबाड़ी हो।




