शराब नहीं, जीवन चुनें: नशा छोड़कर खुशहाल समाज की ओर- संतोष ताम्रकार की कलम से

AP NEWS VISHWARAJ TAMRAKAR
दुर्ग । शराब को अक्सर कुछ पल की खुशी का साधन माना जाता है, लेकिन इसकी वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। नशे की लत धीरे-धीरे व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक सम्मान को प्रभावित करती है। एक व्यक्ति का नशा केवल उसकी जिंदगी ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को भी छीन सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक शराब सेवन से लीवर संबंधी गंभीर बीमारियां, मानसिक तनाव और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ जाती हैं। इसके साथ ही पारिवारिक रिश्तों में दूरियां, आर्थिक नुकसान और सामाजिक प्रतिष्ठा पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।
समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह स्वयं नशे से दूर रहे और अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करे। युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली, खेलकूद और सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
संदेश:
“शराब क्षणिक आनंद का भ्रम देती है, लेकिन जीवनभर का दर्द छोड़ जाती है। आइए, नशामुक्त परिवार और स्वस्थ समाज के निर्माण का संकल्प लें।”
