कस्टम मिलिंग में 59.25 हजार क्विंटल चावल का हिसाब गायब, राम राइस मिल पर कलेक्टर का शिकंजा
रिकॉर्ड में 10,480 क्विंटल चावल जमा होना था, मौके पर मिला 4,554.52 क्विंटल; 2.10 करोड़ के धान के अपयोजन का प्रथमदृष्टया मामला
कवर्धा। बोड़ला ब्लॉक के ग्राम गंडईकला स्थित राम राइस मिल में कस्टम मिलिंग के स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया है। 3 अक्टूबर को राजस्व, खाद्य, पुलिस, नागरिक आपूर्ति निगम, स्टेट वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन और विपणन संघ की संयुक्त टीम के भौतिक सत्यापन में रिकॉर्ड की तुलना में 5,925.48 क्विंटल चावल कम मिला। ऑनलाइन रिकॉर्ड में मिल पर 10,480 क्विंटल चावल जमा होना शेष दर्शाया गया था, जबकि मौके पर केवल 4,554.52 क्विंटल चावल मिला।
जिला प्रशासन ने मामले में मिल संचालक को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। नोटिस में प्रथमदृष्टया 6,797 क्विंटल धान के अपयोजन का उल्लेख है। 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से इसकी कीमत 2 करोड़ 10 लाख 70 हजार 700 रुपए आंकी गई है।
मिल में 8,844 बोरा धान मिला, फिर चावल कहां गया?
जांच टीम को मिल परिसर में कुल 8,844 बोरा धान मिला। इसके अलावा ब्रोकन राइस और चावल का स्टॉक भी दर्ज किया गया। उपलब्ध स्टॉक को अनुपातिक चावल में बदलने पर रिकॉर्ड और मौके की मात्रा में 5,925.48 क्विंटल का अंतर सामने आया। प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए स्टॉक को जब्त कर आगे की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
पंजी और दस्तावेज भी नहीं मिले
भौतिक सत्यापन के दौरान बी-01 पंजी, मासिक विवरणी पंजी समेत अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात नोटिस में दर्ज है। मिल परिसर में करीब 75 हजार खाली जूट बारदाने भी पाए गए। बिजली मीटर की रीडिंग 1458.2 किलोवाट घंटा दर्ज की गई।
जांच टीम पहुंची तो मिल में ताला, संचालक भी अनुपस्थित
संयुक्त टीम के पहुंचने के दौरान मिल संचालक मौके पर मौजूद नहीं थे। परिसर में ताला लगा था और कर्मचारियों के पास चाबी नहीं थी। बाद में मिल प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधि रमेश चन्द्रवंशी जांच में उपस्थित हुए। टीम ने उनका लिखित बयान भी दर्ज किया।
तीन साल ब्लैकलिस्ट और अभियोजन की तैयारी
प्रशासन ने कारण बताओ नोटिस में कस्टम मिलिंग की शर्तों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए कड़ी कार्रवाई प्रस्तावित की है। इसमें जब्त धान-चावल को शासन के पक्ष में राजसात करना, अपयोजित धान की राशि 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से वसूलना, बैंक गारंटी राजसात करना, मिल को तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करना और संचालक के खिलाफ अभियोजन शुरू करना शामिल है।
निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल
मामले में अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल चावल जमा होना शेष था तो स्टॉक में इतना बड़ा अंतर समय रहते सामने क्यों नहीं आया। क्या कस्टम मिलिंग की नियमित निगरानी प्रभावी तरीके से हुई थी? प्रशासन की जांच के बाद अब रिकॉर्ड संधारण और सरकारी धान के रखरखाव की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
हालांकि अभी संचालक का पक्ष सामने आना बाकी है। अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण जवाब, आगे की जांच और विधिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा। प्रशासन ने तीन दिन में जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी है।



