कोसा अब ‘कोशल फैब’ बनकर जाएगा ग्लोबल: CM साय ने लॉन्च किया छत्तीसगढ़ का प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड, बुनकरों को 10.90 करोड़ की सौगात

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर रायपुर में प्रदेश स्तरीय सम्मेलन; 935 मेधावी छात्रों को 81.83 लाख की प्रोत्साहन राशि, 17 वरिष्ठ बुनकर सम्मानित
रायपुर। छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान दिलाने की तैयारी है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर शुक्रवार को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ किया। उन्होंने ब्रांड का लोगो और कैटलॉग भी लॉन्च किया।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड से जुड़े हितग्राहियों और मेधावी विद्यार्थियों को 10 करोड़ 90 लाख रुपए से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की। साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का शुभारंभ किया गया।
‘लूम टू लग्जरी’ से लोकल को मिलेगा ग्लोबल बाजार
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और पारंपरिक हथकरघा देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। सरकार का लक्ष्य इन उत्पादों को ‘लोकल टू ग्लोबल’ पहचान दिलाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, कौशल उन्नयन, प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और नए बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।
‘कोशल फैब’ को ‘लूम टू लग्जरी’ की अवधारणा पर तैयार किया गया है। इसके जरिए छत्तीसगढ़ के कोसा और पारंपरिक हथकरघा उत्पादों को प्रीमियम बाजार तक पहुंचाने की योजना है।
पहली बार रायपुर पहुंचीं बस्तर की आत्मसमर्पित महिलाएं
कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरक दृश्य उस समय देखने को मिला, जब बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने स्वदेशी फैशन शो में रैंप वॉक किया। उन्होंने कोसा सिल्क और अन्य पारंपरिक हथकरघा परिधानों का प्रदर्शन किया।
रैंप पर आत्मविश्वास से कदम बढ़ाती इन महिलाओं की प्रस्तुति को बदलते बस्तर, सम्मानजनक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की नई तस्वीर के रूप में देखा गया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मुख्यमंत्री साय ने महिलाओं से मुलाकात कर उनका हौसला बढ़ाया। बताया गया कि इनमें से अधिकांश महिलाएं पहली बार रायपुर पहुंची थीं।
47 प्रदर्शनियों में 10 करोड़ के उत्पाद बिके
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 47 प्रदर्शनियों के माध्यम से करीब 10 करोड़ रुपए के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई। इस अवधि में 469 आवासविहीन बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास की स्वीकृति दी गई।
महिला स्व-सहायता समूहों को भी बड़ी सहायता मिली है। 2,001 महिला एसएचजी को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया।
436 करोड़ के वस्त्रों की सरकारी खरीदी
खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से पांच विक्रय भंडारों और केंद्रीय वस्त्रागार से विभिन्न सरकारी विभागों को 93 करोड़ रुपए के वस्त्र उपलब्ध कराए गए। वहीं बुनकरों द्वारा निर्मित 436 करोड़ रुपए के वस्त्रों की सरकारी खरीदी की गई।
पांच एयरपोर्ट पर खुलेंगे हैंडलूम-हस्तशिल्प शोरूम
छत्तीसगढ़ के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए देश के पांच प्रमुख हवाई अड्डों पर शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं। रायपुर में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल भी स्थानीय उत्पादों को आधुनिक बाजार उपलब्ध कराएगा।
नवा रायपुर में प्रदेश की पहली गारमेंट इकाई स्थापित की जा रही है। इससे 4,500 से अधिक रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है। वहीं निफ्ट की स्थापना से डिजाइन और टेक्सटाइल क्षेत्र में युवाओं को नए अवसर मिलेंगे।
मुख्यमंत्री ने खुद खरीदी कोसा साड़ी
स्वदेशी प्रदर्शनी में मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ, बिलासा हैंडलूम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, सबरी एम्पोरियम और माटीकला बोर्ड के स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने कारीगरों से उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार की संभावनाओं पर चर्चा की।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने हथकरघा स्टॉल से तत्काल भुगतान कर स्वयं कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम एवं कौशल का सबसे बड़ा सम्मान है।
डिजिटल होगा हथकरघा कारोबार
मुख्यमंत्री ने एनआईसी के सहयोग से छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ द्वारा विकसित इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया। इससे उत्पादों के भंडारण, प्रबंधन, विपणन और वितरण को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।
इस दौरान राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी और टाई-डाई एवं बांधनी रंगाई पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया गया। जशपुर के गोरिया में स्थापित होने वाली ग्लेजिंग यूनिट का भी शुभारंभ हुआ।
935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख की प्रोत्साहन राशि
कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 935 छात्र-छात्राओं को 81.83 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई। वहीं 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मान राशि प्रदान कर उनके योगदान का सम्मान किया गया।
इसके अलावा 49 बुनकरों के लिए बुनकर शेड सह आवास निर्माण हेतु 1.22 करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृति, पांच बुनकर सहकारी समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपए की सहायता और 85 बुनकरों को उन्नत करघे एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए।
हर साल एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने नागरिकों से हर साल कम से कम एक हथकरघा उत्पाद खरीदने की अपील की। उन्होंने कहा कि बुनकरों की मेहनत और पारंपरिक कला को जीवित रखना समाज की साझा जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों से ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़ने की अपील करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों की आजीविका को मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी मजबूती देता है।

