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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: ‘हैंडमेड इन इंडिया’ को वैश्विक ब्रांड बनाने की तैयारी, 65 लाख बुनकरों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (7 अगस्त) के अवसर पर केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हथकरघा केवल भारत की सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत-2047’ के निर्माण का एक महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हथकरघा क्षेत्र को आधुनिक तकनीक, नवाचार और वैश्विक बाजार से जोड़कर ‘हैंडमेड इन इंडिया’ को विश्वस्तरीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना है।

मंत्री ने कहा कि भारत का हथकरघा उद्योग देश का सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है, जिससे 35 लाख से अधिक बुनकर और कारीगर जुड़े हैं। इनमें लगभग 72 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में सरकार ने 797 हथकरघा क्लस्टर, 1.24 लाख से अधिक उन्नत करघे, करीब 97 हजार कारीगरों के कौशल विकास, जीआई टैग, हैंडलूम मार्क, इंडिया हैंडमेड सर्टिफिकेशन और बुनकर सेवा केंद्र जैसी योजनाओं के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत किया है। वर्तमान में देशभर के 29 बुनकर सेवा केंद्र प्रशिक्षण, डिजाइन विकास, कच्चे माल और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कहा कि जल्द शुरू होने वाला राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम देश के 500 जिलों में 1800 क्लस्टरों को सुदृढ़ करेगा और 65 लाख बुनकरों व कारीगरों को लाभान्वित करेगा।

तकनीक से बढ़ेगी उत्पादकता

उन्होंने बताया कि आईआईटी के सहयोग से विकसित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हैंडलूम टेक्नोलॉजी आधुनिक और हल्के करघे विकसित कर रहा है। वहीं ‘हैंडलूम 4.0’ परियोजना के तहत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीक का उपयोग कर उत्पादकता, गुणवत्ता और रखरखाव को बेहतर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

50 हजार रुपए मासिक आय का लक्ष्य

मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य तकनीक और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित कर बुनकरों की आय बढ़ाना है। इसके लिए बेहतर ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन और निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में बुनकरों की मासिक आय 50 हजार रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

युवाओं से की अपील

उन्होंने युवाओं से हथकरघा क्षेत्र में नवाचार, डिजाइन और उद्यमिता के माध्यम से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि हथकरघा को अपनाना केवल परंपरा का सम्मान नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण में सहभागिता भी है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक हथकरघा उत्पाद खरीदने और उपयोग करने की अपील की।

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