बिहान से बदली जिंदगी: नारायणपुर की जेलो बाई बनीं आत्मनिर्भर, हर माह कमा रहीं 30 हजार रुपये

बिहान से बदली जिंदगी: नारायणपुर की जेलो बाई बनीं आत्मनिर्भर, हर माह कमा रहीं 30 हजार रुपये
रायपुर, 3 जुलाई। छत्तीसगढ़ शासन की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आर्थिक बदलाव की नई कहानी लिख रही है। नारायणपुर जिले के ग्राम पंचायत गरांजी निवासी जेलो बाई ने मजदूरी से शुरुआत कर आज स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाला जेलो बाई का परिवार आज स्थिर आय की ओर बढ़ चुका है। वर्ष 2016 से पहले परिवार की आजीविका कृषि मजदूरी और पति के सिलाई कार्य पर निर्भर थी। सीमित और अनिश्चित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण करना चुनौतीपूर्ण था।
बिहान से मिली नई राह
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियानों के तहत जेलो बाई वर्ष 2016 में ‘जय मां शेरावाली स्व-सहायता समूह’ से जुड़ीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने बचत, वित्तीय प्रबंधन और आजीविका गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की।
समूह एवं ग्राम संगठन के मार्गदर्शन से उन्हें शुरुआती तौर पर 15 हजार रुपये की चक्रीय निधि (RF) प्राप्त हुई। इसके बाद व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने 4 लाख रुपये का बैंक लिंकेज ऋण प्राप्त किया।
किराना दुकान से शुरू हुआ सफर, कई आय के साधन जुड़े
वित्तीय सहयोग मिलने के बाद जेलो बाई ने गांव में किराना दुकान शुरू की। मेहनत और बेहतर प्रबंधन से उन्होंने इस व्यवसाय को सफल बनाया। इसके बाद उन्होंने मत्स्य पालन, कपड़ा सिलाई और उन्नत कृषि कार्य जैसी कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया।
आज जेलो बाई इन सभी कार्यों से प्रतिमाह 20 से 30 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें समाज में नई पहचान मिली है।
जेलो बाई ने अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शासन की ‘बिहान’ योजना का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक प्रयास और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर कोई भी व्यक्ति कठिन परिस्थितियों से निकलकर आत्मनिर्भर बन सकता है।
जेलो बाई की कहानी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है और यह साबित करती है कि अवसर और सहयोग मिलने पर महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं।



