निराश्रित गौवंश संरक्षण को मिलेगी नई गति, गौधाम योजना का बढ़ रहा दायरा
रायपुर, 3 अगस्त। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के माध्यम से प्रदेश में घुमन्तू एवं निराश्रित गौवंश के संरक्षण और बेहतर व्यवस्थापन की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने अब ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने और शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।
इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में निराश्रित पशुधन के संरक्षण के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार होगी।
408 आवेदनों में 151 गौधामों को मिली स्वीकृति
घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन के लिए राज्य शासन ने 6 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को गौधाम योजना की स्वीकृति प्रदान की थी। योजना के तहत शासकीय भूमि एवं ऐसे गौठानों का चयन किया जाता है, जहां आवश्यक अधोसंरचना उपलब्ध हो और जो राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित हों।
अब तक योजना के तहत प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 गौधामों को प्रशासनिक स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें से—
- 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण हो चुका है।
- 42 गौधामों में लगभग 5,109 निराश्रित पशुधन का संरक्षण एवं व्यवस्थापन किया जा रहा है।
शेष स्वीकृत गौधामों में पंजीयन और संचालन की प्रक्रिया जारी है।
ग्राम पंचायतों और शहरी गौठानों को मिलेगा अवसर
पशुधन विकास विभाग द्वारा 30 जुलाई 2026 को नियमों में संशोधन करते हुए गौधाम संचालन के लिए ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता देने और शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है।
इसके तहत गौधामों के संचालन की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ, ट्रस्ट और अब ग्राम पंचायतों के माध्यम से भी दी जा सकेगी।
निर्धारित प्रक्रिया के तहत होगा चयन
गौधाम स्थापना के लिए कलेक्टर एवं जिला स्तरीय समिति की अनुशंसा, पंचायत का अनापत्ति प्रमाण-पत्र और स्थल का भौतिक सत्यापन आवश्यक होगा। इसके बाद प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाएंगे, जहां क्रियान्वयन समिति द्वारा समीक्षा के बाद शासन को प्रशासनिक स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
स्वीकृति, अनुबंध और पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला प्रशासन द्वारा गौधामों में निराश्रित पशुओं का व्यवस्थापन सुनिश्चित किया जाएगा।
हर विकासखंड में उत्कृष्ट गौधाम बनाने की तैयारी
राज्य गौ सेवा आयोग ने स्पष्ट किया है कि गौधाम योजना के लिए कोई निश्चित संख्या निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि आयोग की परिकल्पना के अनुसार प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर लगभग 1,460 गौधाम स्थापित करने की दिशा में चरणबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार का उद्देश्य निराश्रित एवं घुमन्तू गौवंश को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है। संशोधित प्रावधानों के बाद प्रदेश में गौधामों के विस्तार को और गति मिलने की संभावना है।

