सफलता की कहानी: दंतेवाड़ा के सखी वन स्टॉप सेंटर ने बिहार की महिला को परिवार से मिलाया

सफलता की कहानी: दंतेवाड़ा के सखी वन स्टॉप सेंटर ने बिहार की महिला को परिवार से मिलाया
रायपुर, 2 अगस्त। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित सखी वन स्टॉप सेंटर संकट में फंसी महिलाओं के लिए भरोसेमंद सहारा साबित हो रहा है। दंतेवाड़ा जिले में एक संवेदनशील मामले में बिहार की एक महिला को सुरक्षित आश्रय देकर उसके परिवार से पुनर्मिलन कराया गया।
जानकारी के अनुसार बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की निवासी सविता देवी अपने मायके से ससुराल जाने के लिए मोतीपुर रेलवे स्टेशन से ट्रेन में सवार हुई थीं। यात्रा के दौरान वह सो गईं और कई स्टेशन पार करते हुए छत्तीसगढ़ के किरंदुल (दंतेवाड़ा) पहुंच गईं। वहां से पैदल चलते हुए वह भटककर भांसी पहुंच गईं।
महिला की स्थिति देखकर स्थानीय लोगों ने भांसी थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने उन्हें सुरक्षित रूप से सखी वन स्टॉप सेंटर, दंतेवाड़ा में अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराया।
सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने तत्काल बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित सखी वन स्टॉप सेंटर और थाना काटी से संपर्क कर महिला का नाम, पता और फोटो भेजा। पहचान की पुष्टि होने के बाद उनके परिवार को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही महिला के पति दंतेवाड़ा पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को सुरक्षित उनके सुपुर्द कर दिया गया।
महिला के पति ने बताया कि उनकी पत्नी की मानसिक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है और वह करीब डेढ़ महीने से लापता थीं। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई पता नहीं चल पाया था। दंतेवाड़ा में पत्नी को सुरक्षित पाकर उन्होंने राहत व्यक्त की और सखी वन स्टॉप सेंटर तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का आभार जताया।
यह मामला दर्शाता है कि सखी वन स्टॉप सेंटर केवल संकटग्रस्त महिलाओं को आश्रय ही नहीं देता, बल्कि उन्हें सुरक्षा, परामर्श, विभिन्न विभागों के साथ समन्वय और परिवार से सुरक्षित पुनर्मिलन जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी उपलब्ध कराता है। यह महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के प्रति सरकार की संवेदनशील पहल का प्रभावी उदाहरण है।




