बोड़ला डिप्टी रेंजर की अनुमति से जंगल से सूखी लकड़ी ले जाने का मामला, वन नियमों पर उठे गंभीर सवाल

बोड़ला /कबीरधाम। बोड़ला वन परिक्षेत्र में जंगल से निजी कार्य के लिए सूखी लकड़ी ले जाने का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार एक जनप्रतिनिधि (सभापति) द्वारा अपने निजी घरेलू कार्य के लिए जंगल से सूखी लकड़ी ले जाने हेतु डिप्टी रेंजर से अनुमति लेने की बात सामने आई है।
मामले की जानकारी मिलने पर बोड़ला निवासी जानी गुप्ता ने संबंधित रेंजर से दूरभाष पर चर्चा की। बातचीत में रेंजर ने बताया कि संबंधित व्यक्ति ने घर में कार्य होने का कारण बताते हुए अनुमति ली थी।
इस पूरे मामले ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या किसी व्यक्ति को निजी उपयोग के लिए आरक्षित या संरक्षित वन क्षेत्र से सूखी लकड़ी ले जाने की अनुमति केवल रेंजर स्तर पर दी जा सकती है?
वन विशेषज्ञों के अनुसार भारत में वनों का संरक्षण भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act, 1927) तथा राज्य सरकार द्वारा बनाए गए वन नियमों के अनुसार किया जाता है। इन प्रावधानों के तहत वन उपज के संग्रहण, परिवहन और निकासी के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। यदि किसी अधिकारी द्वारा अनुमति दी जाती है, तो वह संबंधित नियमों एवं सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अनुरूप होनी चाहिए।
इस मामले में वन विभाग से निम्न बिंदुओं पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की मांग की जा रही है—
- क्या संबंधित अनुमति लिखित रूप में जारी की गई थी?
- अनुमति किस नियम एवं किस प्रावधान के तहत दी गई?
- क्या रेंजर या डिप्टी रेंजर इस प्रकार की अनुमति देने के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं?
- यदि अनुमति दी गई, तो उसकी प्रमाणित प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की जाए?
वन संपदा राष्ट्रीय धरोहर है और उसके उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता एवं विधिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। इसलिए वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में स्पष्ट स्पष्टीकरण जारी कर तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति या विवाद की स्थिति न बने।

