नोटिस और एफआईआर के बाद पीड़ित परिवारों का बड़ा दावा, कथित कमीशन लेने वालों की भी जांच की मांग

कवर्धा। कबीरधाम जिले में धान खरीदी में सामने आई अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के नुकसान के मामलों के बीच अब पीड़ित परिवारों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच की मांग उठाई है। जिन समिति प्रबंधकों, कंप्यूटर ऑपरेटरों और अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है या जिन्हें नोटिस जारी किए गए हैं, उनके परिजनों का कहना है कि यदि धान खरीदी प्रक्रिया में कथित रूप से विभिन्न स्तरों पर कमीशन का लेन-देन हुआ है, तो जांच केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर पीड़ित पक्ष से जुड़े कुछ लोगों ने दावा किया कि धान खरीदी के दौरान विभिन्न स्तरों पर पद के अनुरूप कथित कमीशन दिए जाने की चर्चा लंबे समय से होती रही है। उनका कहना है कि यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो संबंधित सभी स्तरों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
पीड़ित परिवारों का कहना है कि जिन लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज हुए हैं, वे गिरफ्तारी, न्यायालयीन प्रक्रिया और जमानत के लिए परेशान हैं। उनका आरोप है कि यदि पूरे तंत्र में कथित रूप से लाभ का वितरण हुआ, तो केवल समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को ही जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
हड़ताल के दौरान खरीदी पर भी उठे सवाल
पीड़ित पक्ष ने यह भी सवाल उठाया है कि जब समिति प्रबंधक और कंप्यूटर ऑपरेटर हड़ताल पर थे, तब लगभग एक माह तक धान खरीदी का कार्य कैसे जारी रहा। उनका कहना है कि उस अवधि में ऑनलाइन प्रविष्टियां किसने कीं, धान खरीदी का संचालन किसके निर्देशन में हुआ तथा परिवहन और उठाव की निगरानी किस स्तर पर की गई, इसकी भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने संबंधित अवधि के लॉगिन रिकॉर्ड, डिजिटल डाटा, मोबाइल लोकेशन और प्रशासनिक आदेशों की जांच की मांग की है।
64 हजार क्विंटल धान की कमी पर भी सवाल
जिले में भौतिक सत्यापन के दौरान लगभग 64 हजार क्विंटल धान कम मिलने के मामले को लेकर भी पीड़ित परिवारों ने कई प्रश्न उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि गोदामों में धान कम था, तो संबंधित मिलरों को डीओ (डिलीवरी ऑर्डर) किन परिस्थितियों में जारी किए गए और दस्तावेजी प्रक्रिया में इस अंतर की जानकारी किस स्तर पर दर्ज या अनदेखी की गई।
धान खरीदी से जुड़े जानकारों के अनुसार उपार्जन केंद्रों से संग्रहण केंद्र तक भेजी जाने वाली प्रत्येक धान बोरी का मानक वजन 38 किलोग्राम निर्धारित है। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में धान की कमी सामने आने से पूरे तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से मिलने की तैयारी
पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज, कथित वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और अन्य तथ्यों को एकत्रित कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ परिवार मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा सभी जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय करने की मांग करने की तैयारी में हैं।
परिवारों का कहना है कि यदि जांच एजेंसियां आरोपितों और संबंधित अधिकारियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, संपत्ति, परिवहन रिकॉर्ड तथा धान उठाव से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच करती हैं, तो मामले में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
गौरतलब है कि पीड़ित पक्ष द्वारा लगाए गए इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित विभागों और अधिकारियों की ओर से भी इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन दावों को फिलहाल पीड़ित पक्ष के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। यदि भविष्य में जांच एजेंसियां प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों का परीक्षण करती हैं, तो उसी के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


