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देश को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को सस्ती कृषि दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग

भारतीय किसान संघ ने प्रधानमंत्री के नाम भेजे दो महत्वपूर्ण ज्ञापन, राष्ट्रीय तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन व प्रधानमंत्री जन कृषि केंद्र खोलने का किया आग्रह

कवर्धा। भारतीय किसान संघ, जिला कबीरधाम ने किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने तथा देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम दो महत्वपूर्ण ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रेषित किए हैं। ज्ञापन में एक ओर राष्ट्रीय तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन प्रारंभ करने की मांग की गई है, वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र की तर्ज पर प्रत्येक तहसील में प्रधानमंत्री जन कृषि केंद्र खोलने का सुझाव दिया गया है। दोनों ज्ञापन भारतीय किसान संघ के जिला प्रचार प्रमुख दिनेश चंद्रवंशी के हस्ताक्षर से भेजे गए हैं।

संघ ने अपने पहले ज्ञापन में उल्लेख किया है कि भारत कृषि प्रधान देश होने के बावजूद आज भी अपनी खाद्य तेल की जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है। आयातित तेल की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं और मिलावटी तेल के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके बावजूद देश के किसानों को तिलहन फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से वे इनकी खेती से दूरी बना रहे हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि केंद्र सरकार धान की तरह तिलहन फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी, बोनस तथा बीज एवं उर्वरक पर विशेष सहायता उपलब्ध कराए तो बड़ी संख्या में किसान तिलहन उत्पादन की ओर आकर्षित होंगे। इसके साथ ही प्रत्येक बड़े जिले में सरकारी-निजी सहभागिता के माध्यम से आधुनिक ऑयल मिल स्थापित करने, किसानों को सीधे अपनी उपज बेचने की सुविधा देने तथा तिलहन उत्पादन, सिंचाई और कीट नियंत्रण संबंधी वैज्ञानिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

भारतीय किसान संघ का कहना है कि इन उपायों से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, विदेशी मुद्रा की बचत होगी तथा देश अगले दस वर्षों में खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बन सकता है। साथ ही आम नागरिकों को शुद्ध खाद्य तेल उपलब्ध होने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आएगी और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती मिलेगी।

दूसरे ज्ञापन में संघ ने प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों की सफलता का उल्लेख करते हुए कृषि क्षेत्र में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। ज्ञापन के अनुसार वर्तमान समय में किसानों को कीटनाशक, फफूंदीनाशक, खरपतवारनाशक तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों जैसी कृषि दवाइयां निजी दुकानों से ऊंची कीमतों पर खरीदनी पड़ती हैं। कई बार किसानों को नकली अथवा निम्न गुणवत्ता की दवाइयों का सामना करना पड़ता है, जिससे फसल खराब होने के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।

संघ ने बताया कि एक किसान को प्रति सीजन प्रति एकड़ औसतन 5 हजार से 15 हजार रुपये तक कृषि दवाइयों पर खर्च करना पड़ता है। यदि प्रत्येक तहसील में कम से कम दो प्रधानमंत्री जन कृषि केंद्र स्थापित किए जाएं तो किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली कृषि दवाइयां 25 से 75 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा सकती हैं। इससे खेती की लागत में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी और निजी कंपनियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जिस प्रकार जन औषधि केंद्रों ने आम नागरिकों को सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाया है, उसी प्रकार जन कृषि केंद्र किसानों के लिए खेती को कम खर्चीला और अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को भी गति मिलेगी और विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में सहायता मिलेगी।

भारतीय किसान संघ ने केंद्र सरकार से दोनों प्रस्तावों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए किसानों और देशहित में शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है। संघ का मानना है कि तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों को सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण कृषि दवाइयां उपलब्ध कराने से कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी तथा देश आर्थिक रूप से और अधिक आत्मनिर्भर बनेगा।

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