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आधुनिक तकनीक से वन संरक्षण को नई दिशा, छत्तीसगढ़ का ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम बना जंगलों का सतर्क प्रहरी

रायपुर। विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार वन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग कर रही है। इसी क्रम में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम जंगलों में आग लगने की घटनाओं की त्वरित जानकारी देकर समय रहते नियंत्रण सुनिश्चित कर रहा है।

केदार कश्यप के मार्गदर्शन में विकसित यह प्रणाली वन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक तेज, प्रभावी और पारदर्शी बना रही है। इससे वन संपदा, वन्यजीवों और जैव विविधता की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है।

5 से 10 मिनट में मिल जाती है आग लगने की सूचना

पहले जंगलों में आग लगने की सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचने में एक से दो घंटे तक का समय लग जाता था, जिससे आग बड़े क्षेत्र में फैल जाती थी। अब स्वचालित प्रणाली के माध्यम से यह प्रक्रिया केवल 5 से 10 मिनट में पूरी हो जाती है, जिससे समय रहते आग पर नियंत्रण संभव हो रहा है।

उपग्रह और एआई तकनीक से निगरानी

यह प्रणाली उपग्रह आधारित तकनीक और आधुनिक विश्लेषण प्रणाली पर कार्य करती है। उपग्रह जंगलों में तापमान में होने वाले असामान्य बदलाव का पता लगाते हैं। आग की पुष्टि होने पर संबंधित वन मंडल, रेंज और बीट स्तर के अधिकारियों को तत्काल एसएमएस और ई-मेल के माध्यम से अलर्ट भेज दिया जाता है।

जीआईएस आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग

वन विभाग ने इस प्रणाली को जीआईएस आधारित रियल-टाइम डैशबोर्ड से जोड़ा है। सूचना मिलते ही फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कार्रवाई करता है और उसकी ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करता है। इससे संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और भविष्य की रणनीति तैयार करने में भी सहायता मिलती है।

जनभागीदारी पर भी विशेष जोर

वन विभाग केवल तकनीक पर निर्भर नहीं है, बल्कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए जनजागरूकता अभियान, फायर लाइन निर्माण, प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल भी नियमित रूप से आयोजित करता है, ताकि आग की घटनाओं को न्यूनतम किया जा सके।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से वन संपदा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उनका कहना है कि यह प्रणाली वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है तथा भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल साबित हो सकती है।

ऑटोमेटेड फॉरेस्ट फायर अलर्ट सिस्टम आधुनिक तकनीक, त्वरित सूचना तंत्र और प्रभावी प्रबंधन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है। इससे वनाग्नि की घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण संभव हो रहा है और छत्तीसगढ़ की अमूल्य वन संपदा तथा पर्यावरण की सुरक्षा को नई मजबूती मिल रही है।

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