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मनरेगा की डबरियां बन रहीं आजीविका का आधार, धमतरी में बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर


मत्स्य पालन और बागवानी के एकीकृत मॉडल से किसानों की बढ़ेगी आय, 50 गांवों तक होगा विस्तार

रायपुर, 26 जून। धमतरी जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और जल निधि परियोजना के समन्वय से तैयार की गई ‘आजीविका डबरी’ ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आय का प्रभावी माध्यम बन रही है। जल संरक्षण के साथ वैज्ञानिक मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में यह मॉडल सफल साबित हो रहा है।

इस पहल का जायजा लेने के लिए जिला कलेक्टर ने नगरी विकासखंड के ग्राम बोथापारा और चनागांव का दौरा किया। उन्होंने खेतों में पहुंचकर महिला मत्स्य पालकों और प्रगतिशील किसानों से चर्चा की तथा आजीविका डबरी मॉडल को ग्रामीण समृद्धि का प्रभावी माध्यम बताया।

अधिकारियों ने बताया कि लगभग 33 हजार रुपये की लागत से 20×20×3 मीटर आकार की आजीविका डबरी तैयार की जाती है, जिसमें वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन कर कम लागत में बेहतर आय अर्जित की जा सकती है। इस मॉडल को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए एबिस कंपनी के सहयोग से मछली आहार पर 25 प्रतिशत की छूट भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे किसानों की उत्पादन लागत कम हो रही है।

ग्राम बोथापारा की महिला मत्स्य पालक सावित्री दर्रो ने अपने खेत में दो आजीविका डबरियां तैयार कर कतला, रोहू और मृगल प्रजाति की मछलियों का पालन शुरू किया है। वहीं उनके पुत्र को आधुनिक मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देने की भी योजना बनाई गई है, ताकि क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई तकनीकों का लाभ मिल सके।

ग्राम चनागांव के प्रगतिशील किसान नारायण सिंह नेताम ने डबरी के साथ बागवानी को जोड़कर एकीकृत खेती का सफल मॉडल विकसित किया है। डबरी के पानी का उपयोग आम की बागवानी में किया जा रहा है, जिससे उन्हें वर्षभर अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।

जिला प्रशासन ने मनरेगा के तहत निर्मित परिसंपत्तियों का उत्पादक उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। वर्तमान में यह मॉडल धमतरी जिले के 16 गांवों में संचालित है। इसकी सफलता को देखते हुए अगले चरण में 50 गांवों में 50 नई आजीविका डबरियों के माध्यम से इस योजना का विस्तार किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण, पोषण सुरक्षा और सतत कृषि विकास को नई दिशा देगी।

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