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उपार्जन केंद्रों से गायब 70 हजार क्विंटल धान 21 करोड़ रुपये की शेष मात्रा पर उठे सवाल

उपार्जन केंद्रों से गायब 70 हजार क्विंटल धान, 21 करोड़ रुपये की शेष मात्रा पर उठे सवाल

उपार्जन केंद्रों में धान नहीं, आंकड़ों में खरीदी पूरी—जिले में बड़ा शॉर्टेज मामला।

 

 

कवर्धा। जिले में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का कार्य समाप्त होने और धान उठाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मार्कफेड की रिपोर्ट में जिले की विभिन्न सहकारी समितियों में लगभग 70 हजार क्विंटल धान की शॉर्टेज दर्ज की गई है। प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने जिला प्रशासन की धान उठाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते सहकारिता विभाग बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।छत्तीसगढ़ को देश का “धान का कटोरा” कहा जाता है, जहां हर वर्ष करोड़ों क्विंटल धान की खरीदी की जाती है। लेकिन खरीदी के बाद कस्टम मिलिंग के लिए मिलरों को धान उठाव की प्रक्रिया के बीच इतनी बड़ी मात्रा में धान का अभाव सामने आना बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिले की दर्जनों समितियों में रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण के बीच बड़ा अंतर पाया गया है।सूत्रों के अनुसार भौतिक सत्यापन में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर संकेत कर रहे हैं कि धान खरीदी, भंडारण और उठाव की पूरी प्रक्रिया में कहीं न कहीं गंभीर अनियमितता हुई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि किसानों से खरीदा गया हजारों क्विंटल धान आखिर कहां गया और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। इस मामले ने समिति प्रबंधकों, कम्प्यूटर ऑपरेटरों तथा सहकारिता विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को भी संदेह के घेरे में ला दिया है। यदि रिकॉर्ड में धान मौजूद है लेकिन भंडारों में नहीं, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि बड़े वित्तीय घोटाले की ओर भी इशारा कर सकता है।

    खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, जिला विपणन संघ तथा जिला नोडल अधिकारियों पर प्रभारियों को संरक्षण देने का आरोप

    प्रदेश सचिव युवा कांग्रेस आकाश केशरवानी ने जिले में धान उठाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाया है। उन्होंने कहा कि 26 मई को कलेक्टर द्वारा आयोजित समीक्षा बैठक में 29 मई तक सभी उपार्जन केंद्रों से धान उठाव पूर्ण करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती।आकाश केशरवानी ने कहा कि यदि उपार्जन केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में धान मौजूद ही नहीं है तो फिर उठाव किस धान का किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी के आंकड़ों को कागजों में बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया और अब कथित अनियमितताओं पर पर्दा डालने के लिए उठाव की औपचारिक प्रक्रिया दिखाई जा रही है।

    जिले में सामने आ रही धान शॉर्टेज की स्थिति बोगस खरीदी और दस्तावेजी हेरफेर की आशंकाओं को और मजबूत करती है। यदि उपार्जन केंद्रों, गोदामों तथा संबंधित राइस मिलों का स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं भौतिक सत्यापन कराया जाए तो धान की वास्तविक कमी का आंकड़ा वर्तमान में सामने आ रहे आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है। युवा कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि शासन के नियमों के अनुसार धान के स्कंध (स्टॉक) में कमी पाए जाने पर संबंधित प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन अब तक ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग, जिला विपणन संघ तथा जिला नोडल अधिकारियों पर प्रभारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि कमीशनखोरी के चलते जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की जा रही है।

    धान स्कंध में कमी पाए जाने की स्थिति में कार्यवाही संबंधी प्रावधान

    धान स्कंध में 0.5 प्रतिशत से अधिक एवं 1 प्रतिशत तक कमी पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए।
    धान स्कंध में 1 प्रतिशत से अधिक एवं 2 प्रतिशत तक कमी पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी के विरुद्ध विभागीय जांच संस्थापित की जाए।
    धान स्कंध में 2 प्रतिशत से अधिक कमी पाए जाने पर संबंधित केंद्र प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए विभागीय जांच प्रारंभ की जाए तथा प्रकरण में आपराधिक कृत्य पाए जाने की स्थिति में कठोर वैधानिक कार्यवाही करते हुए प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज कराई जाए।

    मार्कफेड की 27 मई की रिपोर्ट में इन उपार्जन केन्द्रो से धान उठाव की शेष मात्रा

    कामठी 4067 क्विंटल , सूरजपुरा 3831 क्विंटल ,पेण्ड्री कला 2674 क्विंटल , जुनवानी 2660 क्विंटल , रणवीरपुर 2647 क्विंटल , उसरवाही 2495 क्विंटल ,
    कुरवा 2484 क्विंटल , समनापुर (बहमनी ) 2386 क्विंटल , बोदा तरेगांव 2386 क्विंटल , धरमगढ़ 1664 क्विंटल , समनापुर 1664 क्विंटल , विरेन्द्र नगर
    1593 क्विंटल , कुकदूर 1549 क्विंटल , सूरजपुरा मोतीमपुर 1463 क्विंटल , बिड़ोरा रक्से 1461 क्विंटल , राजनवागॉव 1375 क्विंटल , मोहगॉव 1348 क्विंटल
    सहसपुर लोहारा 1308 क्विंटल , सराईसेत 1304 क्विंटल , बिरनपुरकला 1265 क्विंटल , ठाठापुर (रामपुर ) 1253 क्विंटल ,ठाठापुर (रामपुर ) 1253 क्विंटल ,पनेका 1162 क्विंटल , सहसपुर लोहारा ( बसिनझोरी ) 1155 , चचेड़ी 1127 क्विंटल , बैजलपुर 1108 क्विंटल , रुसे 1050 क्विंटल , बचेड़ी (छिरबांधा) 1035 ,
    सारंगपुर 1031 क्विंटल , खपरी 971 क्विंटल , चारभाठा 970 क्विंटल

    कबीरधाम जिले में धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपार्जन केंद्रों में भौतिक रूप से धान उपलब्ध नहीं होने के बावजूद रिकॉर्ड में खरीदी दर्शाए जाने से बोगस खरीदी और धान के गोलमाल की आशंका गहरा गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जिले में लगभग 70 हजार क्विंटल धान शॉर्टेज पाया गया है, जिससे खाद्य विभाग, उपार्जन केंद्रों और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव आकाश केशरवानी ने आरोप लगाया है कि धान खरीदी सीजन के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि यदि उपार्जन केंद्रों, संग्रहण केंद्रों और राइस मिलों के स्टॉक का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है। उन्होंने मांग की कि जिले के सभी उपार्जन केंद्रों, संग्रहण केंद्रों और राइस मिलों के धान एवं चावल स्टॉक का संयुक्त सत्यापन कराया जाए तथा शॉर्टेज के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि किसानों के नाम पर खरीदे गए धान का वास्तविक हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। आकाश केशरवानी ने कहा कि धान खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि 70 हजार क्विंटल धान की शॉर्टेज की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो यह किसानों के हितों के साथ बड़ा अन्याय होगा।

    धान खरीदी थमने के बाद अब उठाव का काम भी लगभग अंतिम दौर में पहुंच गया है। कवर्धा, जिले में उठाव के बाद शार्टेज के आंकड़े सामने आने लगे हैं। वहीं कवर्धा जिले में 70 हजार क्विंटल धान की कमी सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ राज्य जिसे पूरे देश में धान का कटोरा कहा जाता है, वहां समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और उसके बाद कस्टम मिलिंग के लिए मिलरों द्वारा किए जाने वाले धान उठाव के बीच जिले भर की की दर्जनों सहकारी समितियों में धान के भारी शॉर्टेज का एक बहुत ही गंभीर और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे और शासन व्यवस्था की नींद उड़ाकर रख दी है। इस पूरे घटनाक्रम में कवर्धा जिले की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक और भयावह बनी हुई है। वर्तमान में भौतिक सत्यापन के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वह सीधे तौर पर समिति प्रबंधकों, कम्प्यूटर ऑपरेटरों और सहकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गहरा संदेह पैदा करते हैं कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में किसानों से खरीदा गया धान अचानक कहां गायब हो गया।

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