G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhINDIAKabirdhamखास-खबर

डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मरीजों को नहीं मिल रहीं बुनियादी सुविधाएं

कुकदूर/कवर्धा। वनांचल क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र माना जाने वाला कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन दिनों गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रहा है। अस्पताल में डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि वार्डों के सभी बेड भरे होने के कारण कई मरीजों को इंजेक्शन कक्ष में उपचार देना पड़ रहा है, जबकि उनके परिजन फर्श पर चादर बिछाकर रात गुजारने को मजबूर हैं।
अस्पताल परिसर में प्रवेश करते ही संसाधनों की कमी का अंदाजा लगाया जा सकता है। पानी पीने के गिलास और पानी निकालने के बर्तन तक रस्सी से बांधकर रखे गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि खुले छोड़ने पर ये सामान अक्सर गायब हो जाते हैं।
अस्पताल में सड़क दुर्घटना, जहर सेवन, मारपीट और अन्य गंभीर मामलों के मरीजों के साथ-साथ मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लेकिन सुविधाओं और स्टाफ की कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था दबाव में है।
जानकारी के अनुसार, यहां पदस्थ तीन एमबीबीएस डॉक्टर लंबे अवकाश पर हैं, जिसके चलते अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित हुई है। विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद रिक्त हैं। इसके अलावा फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन और एंबुलेंस चालक जैसे महत्वपूर्ण पद भी खाली पड़े हैं।
स्टाफ की कमी का असर ड्यूटी व्यवस्था पर भी दिखाई दे रहा है। उपलब्ध रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और ग्रामीण चिकित्सा सहायकों (आरएमए) की ड्यूटी सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक निर्धारित की गई है। लगातार 12 घंटे की ड्यूटी के बाद भी इमरजेंसी मामलों में उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।
अस्पताल में वर्तमान में एक ही डॉक्टर को ओपीडी, इमरजेंसी, मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) और पोस्टमार्टम जैसी जिम्मेदारियां संभालनी पड़ रही हैं। इससे मरीजों को समय पर उपचार मिलने में कठिनाई हो रही है।
कुकदूर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कुकदूर, कामठी, मुनमुना, पोलमी, भेलकी, भाकुर, सेंदुरखार, नेऊर, रुखमीदादर, बदना और पंडरीपानी सहित कुल 11 उप स्वास्थ्य केंद्र संचालित होते हैं। इन गांवों के हजारों ग्रामीण इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं।
वर्तमान में अस्पताल का संचालन पंडरिया ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) के प्रभार में किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी और वनांचल क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए यहां स्थायी प्रशासनिक और चिकित्सा व्यवस्था की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
इस संबंध में पंडरिया बीएमओ डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि तीन डॉक्टरों के अवकाश पर होने के कारण व्यवस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों के अनुसार ड्यूटी रोस्टर तैयार किया गया है तथा आवश्यकतानुसार कर्मचारियों को ऑन-कॉल भी रखा गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page