विधि, समाज और संस्कृति की त्रिवेणी डॉ. उषा किरण बाजपेयी का भव्य अभिनंदन
नारी शक्ति बिलासपुर ने सेवा, समर्पण और संस्कारों को किया सम्मानित, अनेक गणमान्य हस्तियां रहीं उपस्थित

बिलासपुर। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते…” का सूत्र वाक्य रविवार को बिलासपुर में साकार रूप में देखने को मिला, जब नारी शक्ति बिलासपुर द्वारा समाजसेवा, विधि और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली डॉ. उषा किरण बाजपेयी का गरिमामय अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। सदस्य किशोर न्याय बोर्ड एवं जिला कुटुंब न्यायालय में अपनी सेवाएं पूर्ण करने के उपलक्ष्य में आयोजित इस समारोह में प्रदेश की अनेक प्रमुख हस्तियों ने उन्हें सम्मानित करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन की उपलब्धियों की सराहना की।
प्रार्थना संभव भवन में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ नीति आयोग के उपाध्यक्ष (कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त) गणेश शंकर मिश्रा (आईएएस), उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष गौतम चौरड़िया, महापौर पूजा विधानी, गौरकापा धाम के महंत विष्णु गिरी, राष्ट्रपति सम्मानित विदुषी डॉ. पुष्पा दीक्षित, महर्षि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरेश तिवारी तथा छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय पाठक सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
सभी वक्ताओं ने कहा कि डॉ. उषा किरण बाजपेयी ने अपनी कर्मठता, निष्ठा और संवेदनशील कार्यशैली से समाज में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। उन्होंने विधि, सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को निरंतर दिशा दी है तथा उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। वक्ताओं ने विश्वास जताया कि सेवा निवृत्ति के बाद भी उनका अनुभव और मार्गदर्शन समाज को मिलता रहेगा।
कार्यक्रम में डॉ. उषा किरण बाजपेयी के सम्मान में प्रकाशित एक विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया गया तथा भजन संध्या का आयोजन हुआ। समारोह की शुरुआत नारी शक्ति संस्था की सदस्यों द्वारा रोचना तिलक, आरती और पुष्प वर्षा के साथ अतिथि स्वागत से हुई। संस्था की संरक्षक डॉ. शकुंतला जितपूरे ने अभिनंदन पत्र का वाचन किया, जबकि संस्था की सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से अभिनंदन पत्र भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन संस्था की उपाध्यक्ष संध्या शुक्ला तथा आभार प्रदर्शन सचिव श्वेता पांडे ने किया।
डॉ. उषा किरण बाजपेयी पिछले लगभग 35 वर्षों से बिलासपुर में विधि, शिक्षा, समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने नारी शक्ति छत्तीसगढ़ के माध्यम से महिलाओं के सम्मान और स्वावलंबन के लिए शहर से गांव तक उल्लेखनीय कार्य किया है। वे स्काउट-गाइड की आजीवन सदस्य हैं तथा दो बार राज्य आयुक्त (गाइड) का दायित्व निभा चुकी हैं। जिला कुटुंब न्यायालय में परामर्शदाता के रूप में उन्होंने अनेक परिवारों को टूटने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा वे विभिन्न महिला मंडलों, विधिक संस्थाओं, आकाशवाणी बिलासपुर और महर्षि विद्या मंदिर की आंतरिक शिकायत समिति सहित अनेक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं। समाजशास्त्र विषय में धनवार जनजाति की महिलाओं की समस्याओं पर उनका शोधकार्य भी उल्लेखनीय रहा है।
समारोह में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में जब संयुक्त परिवारों की परंपरा कमजोर होती जा रही है, ऐसे समय में वाजपेयी परिवार ने अपने संस्कारों और पारिवारिक मूल्यों को जीवंत बनाए रखा है। एक ही छत के नीचे छह भाइयों का संयुक्त परिवार और परिवार की बहुओं की सहभागिता भारतीय संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। डॉ. उषा किरण बाजपेयी ने एक बेटी, बहन, पत्नी, बहू और मां की जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करते हुए सार्वजनिक जीवन में भी अनुकरणीय योगदान दिया है।
इस अवसर पर शहर के साहित्यकार, कवि, चिंतक, समाजसेवी, अधिवक्ता, जनप्रतिनिधि तथा विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। समारोह ने यह संदेश दिया कि नारी सम्मान केवल विचार नहीं, बल्कि व्यवहार और संस्कार का विषय है, जिसे नारी शक्ति बिलासपुर और वाजपेयी परिवार ने अपने आयोजन के माध्यम से सार्थक रूप में प्रस्तुत किया।



