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विश्व पुस्तक दिवस: ज्ञान, प्रेरणा और जीवन का सच्चा साथी : श्रीमती संतोष ताम्रकार

AP न्यूज विश्वराज ताम्रकार स्टेट रिपोर्टर छत्तीसगढ़

दुर्ग : हर वर्ष 23 अप्रैल को पूरे विश्व में विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 1995 में UNESCO द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और पुस्तकों के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना है।
पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। यह केवल कागज़ और शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुभव और विचारों का विशाल भंडार होती हैं। पुस्तकें हमें अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती हैं और जीवन को सही दिशा प्रदान करती हैं।
पुस्तकों के माध्यम से हम विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इतिहास, साहित्य और रसायन विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों का गहन अध्ययन कर सकते हैं। यह हमारी सोचने और समझने की क्षमता को विकसित करती हैं तथा हमें शून्य से शिखर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
भारतीय साहित्य में भी अनेक महान ग्रंथ मौजूद हैं, जैसे रामचरितमानस और पंचतंत्र, जो जीवन के आदर्श, नैतिकता और चरित्र निर्माण का मार्ग दिखाते हैं। इसके अलावा महापुरुषों की जीवनियां और साहित्यकारों की रचनाएं हमें निरंतर प्रेरित करती हैं।
एक अच्छी पुस्तक सच्चे मित्र और गुरु की भूमिका निभाती है। यह सुख-दुख में साथ देती है, हमें हंसाती है और कभी-कभी भावुक भी कर देती है। पुस्तकें व्यक्ति को कभी अकेलापन महसूस नहीं होने देतीं और जीवन को सार्थक बनाती हैं।
कहा जाता है कि “एक अच्छी पुस्तक हजारों मित्रों के समान होती है।” वास्तव में, जो व्यक्ति पुस्तकों को अपना मित्र बना लेता है, उसका जीवन समृद्ध और सफल बन जाता है। पुस्तकें हमें सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं और हर परिस्थिति में साथ निभाती हैं।
अंततः, यदि जीवन में कोई श्रेष्ठ दान करना हो, तो वह “शिक्षा का दान” है। शिक्षा ही वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदलने के साथ-साथ समाज को नई दिशा देने में सक्षम है।

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