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आगामी मानसून 2024 की तैयारी: कलेक्टर ने बाढ़ प्रबंधन और राहत व्यवस्था पर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

दिनांक 30 मई 2024 // कलेक्टर  चंद्रकांत वर्मा की अध्यक्षता में मानसून 2024 की तैयारी और प्राकृतिक आपदा से बचाव एवं राहत व्यवस्था के संबंध में जिला कार्यालय के सभा कक्ष में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और आपदा प्रबंधन के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर श्री वर्मा ने निर्देश दिया कि अतिवृष्टि एवं बाढ़ की स्थिति में जिला और तहसील मुख्यालयों में कंट्रोल रूम स्थापित किए जाए और हेल्पलाइन नंबर 07820299631 भी जारी किया जाए। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों में न्यूनतम 10 किमी की दूरी पर राहत शिविरों की स्थापना करने और जिला कार्यालय में सुबह 8 बजे और शाम 5 बजे रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने नदियों के जल स्तर में वृद्धि की स्थिति में विशेष सतर्कता बरतने और जिला स्तर पर वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से सूचना का तत्काल आदान-प्रदान सुनिश्चित करने को कहा है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई के लिए विशेष टीमें तैनात करने और सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए है। विद्युत विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा हैं। इसके अलावा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में यातायात और पुल की स्थिति पर निगरानी रखने और क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुलों की मरम्मत के लिए त्वरित कार्रवाई करने को कहा है। सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि वे आपदा प्रबंधन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्परता से कार्रवाई करें।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए व्यापक राहत और पुनर्वास की कार्यवाही करने को कहा है। कलेक्टर वर्मा ने स्वास्थ्य अधिकारी को मौसमी बीमारियों, मलेरिया और एनीमिया की रोकथाम के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षणों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है, और इसके लिए विशेष मेडिकल किट और मच्छरदानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चार महीने के लिए आवश्यक खाद्य सामग्री और केरोसीन का भंडार तत्काल उपलब्ध कराने कहा है। राहत शिविरों की स्थापना और आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी खाद्य विभाग, आदिवासी विभाग और जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपी गई है। ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मनरेगा के तहत अधिकतम रोजगार मूलक कार्य स्वीकृत किया जाए। नदी घाटों पर गोताखोरों की तैनाती और मोटर बोट संचालन के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कृषि विभाग को खाद और बीज का भंडार सुनिश्चित करने एवं महिला एवं बाल विकास विभाग को पोषण आहार की व्यवस्था करने के निर्देश दिए है। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से हुई क्षति का सर्वेक्षण 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत करने कहा गया तथा प्रभावितों को 15 दिनों के भीतर आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में वन मंडलाधिकारी आलोक कुमार शर्मा, अपर कलेक्टर प्रेम कुमार पटेल, संयुक्त कलेक्टर  सुरेन्द्र कुमार ठाकुर, एसडीएम छुईखदान-गंडई सुश्री रेणुका रात्रे, एसडीएम खैरागढ़  टंकेश्वर साहू सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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