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15 जून से प्रारंभ होगा मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का 14वां चरण

2030 तक उन्मूलन का लक्ष्य, घर-घर सर्वे, त्वरित जांच एवं पूर्ण उपचार पर जोर

कवर्धा। कबीरधाम जिले में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत “मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान” के अंतर्गत 14वां चरण दिनांक 15 जून 2026 से 14 जुलाई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक राज्य को पूर्णतः मलेरिया मुक्त बनाना तथा वर्ष 2027 तक शून्य स्थानीय मलेरिया प्रकरण प्राप्त करना है। इस दौरान समुदाय स्तर पर मलेरिया परजीवी के समूल उन्मूलन एवं संक्रमण श्रृंखला को समाप्त करने के लिए व्यापक स्तर पर सर्वेक्षण जांच, उपचार एवं जन-जागरुकता गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

  सीएमएचओ डॉ तूरे ने बताया कि अभियान के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण एवं बैठक आयोजित की जा चुकी है तथा मैदानी स्तर पर कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। विकासखंड बोड़ला के 114 ग्रामों में की 58,159 जनसंख्या को कवर करते हुए घर-घर जाकर मलेरिया जांच की जाएगी। इसके लिए 114 सर्वे दल गठित किए गए हैं जिनमें प्रत्येक दल में दो स्वास्थ्य कार्यकर्ता शामिल हैं। सर्वे के दौरान प्रत्येक घर में स्टिकर चस्पा किया जाएगा तथा जांच किए गए व्यक्तियों के पैर के अंगूठे के नाखून में नेल मार्किंग की जाएगी, जिससे दोहराव से बचा जा सके और शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित हो।

    अभियान के अंतर्गत घर-घर जाकर RDT किट के माध्यम से मलेरिया जांच की जाएगी तथा पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों को तत्काल मलेरिया रोधी दवाएं उपलब्ध कराकर पूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। जांच किए गए व्यक्तियों का विवरण आयुष्मान कार्ड नंबर/आभा आईडी नंबर/ राशन कार्ड नंबर के आधार पर मोबाइल एनआईसी ऐप में रियल टाइम दर्ज किया जाएगा, जिससे निगरानी एवं मूल्यांकन की प्रक्रिया सुदृढ़ एवं पारदर्शी बनी रहे। साथ ही मच्छरदानी  के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा तथा लार्वा स्रोत नियंत्रण एवं स्वच्छता गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।अभियान के दौरान जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी की जाएगी तथा साप्ताहिक समीक्षा के माध्यम से प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा।

   अभियान की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं तथा आवश्यक सामग्री जैसे RDT किट, मलेरिया रोधी दवाएं एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराया गया हैं। मैदानी स्तर पर मितानिन एमटी एवं उप स्वास्थ्य केंद्र के कार्यकर्ता सक्रिय रूप से घर-घर जाकर सर्वे, जांच एवं उपचार कार्य संपादित करेंगे तथा समुदाय को मलेरिया से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करेंगे।

जिले का परजीवी सूचकांक गिरकर पहुंचा 01 पर
जिले में मलेरिया उन्मूलन के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप पिछले 10 वर्षों में जिले का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) 10 से घटकर 1 तक पहुंच गया है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए राज्य एवं राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप वर्ष 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

लक्षणों को न करें नजरअंदाज, लें त्वरित उपचार, सर्वेक्षण दल को दें जानकारी
मलेरिया के प्रमुख लक्षणों में ठंड के साथ बुखार आना सिरदर्द, उल्टी एवं दस्त शामिल हैं। ऐसे कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच कराना आवश्यक है। समय पर जांच एवं पूर्ण उपचार से मलेरिया को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
अतः अभियान के अंतर्गत चिन्हित सभी ग्रामों के समस्त जनसमुदाय से अपील की जाती है कि वे मलेरिया जांच में सहयोग करें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सही जानकारी दें तथा इस अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। जनसहयोग एवं सहभागिता से ही “मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार किया जा सकेगा।

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