समान नागरिक संहिता के प्रारूप में जनभागीदारी, आठ जिलों के प्रतिनिधियों ने दिए सुझाव

महिलाओं और बच्चों के अधिकारों की मजबूती पर जोर, धार्मिक आस्था और पूजा-पद्धतियों में हस्तक्षेप नहीं होगा : शत्रुघ्न सिंह

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए बुधवार को बिलासपुर में संभाग स्तरीय परामर्श बैठक आयोजित की गई। देवकी नंदन दीक्षित सभागृह, लाल बहादुर शास्त्री स्कूल परिसर में हुई बैठक में आठ जिलों के सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने अपने सुझाव रखे। विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में राज्य शासन की समान नागरिक संहिता उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त प्राचार्य ज्योति रानी सिंह, रायपुर संभागायुक्त एवं समिति के सचिव श्याम धावड़े तथा बिलासपुर संभागायुक्त सुनील जैन उपस्थित रहे।
पारिवारिक कानूनों में समानता और अधिकारों के संरक्षण पर जोर
समिति के सदस्य शत्रुघ्न सिंह ने समान नागरिक संहिता की पृष्ठभूमि और आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारिवारिक मामलों से जुड़े दो दर्जन से अधिक कानून और प्रावधान प्रचलन में हैं, जिनमें कई तरह की भिन्नताएं हैं। संहिता पर विचार का उद्देश्य पारिवारिक कानूनों में समानता को बढ़ावा देना तथा महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक मजबूत बनाना है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 44 का उल्लेख करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता का संबंध विवाह, विवाह-विच्छेद, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक एवं पारिवारिक विषयों से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य किसी भी धर्म की पूजा-पद्धति, धार्मिक आस्था या रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप करना नहीं है।
उन्होंने बताया कि विभिन्न वर्गों से मिलने वाले सुझावों और मौजूदा कानूनी व्यवस्थाओं के अध्ययन के आधार पर संहिता का प्रारूप तैयार किया जाएगा।
पक्ष और विपक्ष में रखे गए विचार
बैठक में बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के पदाधिकारियों, शिक्षाविदों, विधि विशेषज्ञों तथा गणमान्य नागरिकों ने समान नागरिक संहिता के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार रखे।
चर्चा में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं, विभिन्न समुदायों की प्रथाओं और आधुनिक कानूनी सुधारों से जुड़े मुद्दे सामने आए। समिति के सदस्यों ने कहा कि प्राप्त सुझावों का अध्ययन कर प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ की वर्तमान कानूनी स्थिति के साथ अन्य राज्यों में प्रचलित व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है। सभी सुझावों और विधिक अध्ययन के आधार पर प्रारूप राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही आवश्यक विधायी और प्रशासनिक अनुशंसाएं भी दी जाएंगी।
30 अक्टूबर तक ऑनलाइन भेज सकते हैं सुझाव
बैठक में पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समान नागरिक संहिता की अवधारणा और इससे जुड़े प्रमुख विषयों की जानकारी दी गई। आम नागरिक और संगठन 30 अक्टूबर 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट ucc.cgstate.gov.in पर अपने सुझाव दे सकते हैं। इसके अलावा ucc-chhattisgarh@cg.gov.in पर ई-मेल के माध्यम से भी सुझाव भेजे जा सकते हैं।
बैठक में रजक समाज के अध्यक्ष निलेश रजक, मराठा समाज के अध्यक्ष शशांक चौहान, जायसवाल समाज के अध्यक्ष रमेश जायसवाल, यादव समाज के अध्यक्ष यशवंत यादव, मुस्लिम समाज के मुरजता वनक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रदीप कुमार शर्मा, साहू समाज के ललित साहू, राजमहंत दसोराम खाण्डे, सुधीर खंडेलवाल, समाजसेवी एवं पत्रकार हबीब मेनन, वंदे मातरम मित्र मंडल बिलासपुर के महेंद्र जैन, अधिवक्ता नसीमुद्दीन अंसारी, आदिवासी गोंडवाना समाज के अध्यक्ष श्याम, बिलासपुर के एल्डरमैन विष्णु सोनी, कोरबा के शिक्षाविद सूर्यकुमार खूंटे, जांजगीर के विकास शर्मा, वेदप्रकाश अग्रवाल और बिलासपुर के पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक उपस्थित रहे।

