छत्तीसगढ़ में UCC लागू करने की तैयारी तेज, 15 अक्टूबर तक जनता से मांगे सुझाव
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने इस संबंध में गठित पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति के माध्यम से आम जनता, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों, धार्मिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों से 15 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और अभिमत आमंत्रित किए हैं। सरकार का उद्देश्य ऐसा कानून तैयार करना है, जो सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक व्यवस्था सुनिश्चित कर सके।
पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी समिति
समान नागरिक संहिता पर सुझाव तैयार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।
समिति में सेवानिवृत्त आईएएस शत्रुघ्न सिंह और एम.के. राऊत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार तथा सेवानिवृत्त प्राचार्या ज्योति रानी सिंह सदस्य के रूप में शामिल हैं।
इन विषयों पर होगा व्यापक अध्ययन
समिति राज्य में यूसीसी लागू करने से जुड़े सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर रही है। इसके तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषयों पर मौजूदा कानूनों की समीक्षा की जाएगी।
इसके अलावा समिति अन्य राज्यों में लागू समान नागरिक संहिता का अध्ययन करेगी और जनता व विभिन्न संगठनों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएं सौंपेगी।
जनता की राय से तैयार होगा मसौदा
सरकार का कहना है कि यूसीसी जैसा महत्वपूर्ण कानून तैयार करने से पहले समाज के सभी वर्गों की राय को शामिल किया जाएगा। इसी उद्देश्य से सभी नागरिकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, समुदायों और राजनीतिक दलों से अपने सुझाव भेजने की अपील की गई है।
15 अक्टूबर तक भेज सकते हैं सुझाव
नागरिक 15 अक्टूबर 2026 तक अपने सुझाव निम्न माध्यमों से भेज सकते हैं—
- ई-मेल: ucc-chhattisgarh@cg.gov.in
- वेब पोर्टल: https://ucc.cgstate.gov.in
- डाक द्वारा: कार्यालय, समान नागरिक संहिता समिति, न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइन, कक्ष क्रमांक-202, रायपुर (छत्तीसगढ़) – 492001
देश के चुनिंदा राज्यों में होगा शामिल
राज्य सरकार के अनुसार, समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में छत्तीसगढ़ भी आगे बढ़ रहा है। समिति की रिपोर्ट और प्राप्त सुझावों के आधार पर आगे की विधायी प्रक्रिया तय की जाएगी।


