युवा मुट्ठी के संकल्प से नेऊरगांव खुर्द ने रचा इतिहास : अंबेडकर जयंती पर 50 यूनिट रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल

कवर्धा। सेवा परमो धर्म : के मंत्र को आत्मसात करते हुए ग्राम नेऊरगांव खुर्द के युवाओं ने मंगलवार को इतिहास रच दिया। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के पावन अवसर पर ‘युवा मुट्ठी संगठन’ के तत्वावधान में आयोजित रक्तदान महादान शिविर में युवाओं ने उत्साह का परिचय देते हुए 50 यूनिट रक्त एकत्रित किया। किसी ग्रामीण अंचल में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस शिविर की सफलता ने पूरे जिले में चर्चा बटोरी है।
लक्ष्य के प्रति अटूट समर्पण
युवा मुट्ठी संगठन ने इस विशेष दिन के लिए 50 यूनिट का लक्ष्य निर्धारित किया था। सुबह से ही गांव के नवधा स्थल सामुदायिक भवन में युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देखते ही देखते लक्ष्य पूरा कर लिया गया। उल्लेखनीय है कि इस शिविर में न केवल नेऊरगांव बल्कि आसपास के गांवों के युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भोरमदेव ब्लड बैंक की विशेषज्ञ टीम ने पूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया।
स्वास्थ्य परीक्षण से बुजुर्गों और माताओं को मिला लाभ
रक्तदान के साथ-साथ संगठन ने गांव के स्वास्थ्य के प्रति भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर में गांव के बुजुर्गों, वरिष्ठ नागरिकों और माताओं का चेकअप किया गया। डॉक्टरों ने ग्रामीणों को आवश्यक परामर्श और दवाइयां भी उपलब्ध कराईं।
विकास और समरसता का अग्रदूत : युवा मुट्ठी संगठन
ग्राम के सांस्कृतिक विकास से लेकर सामाजिक एकता तक, युवा मुट्ठी संगठन आज क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन चुका है। संगठन केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि: नियमित वृक्षारोपण के माध्यम से गांव को हरा-भरा बनाने का संकल्प लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों को जागरूक करना , होली मिलन जैसे आयोजनों के जरिए भाईचारे को बढ़ावा देते हुए सामाजिक समरसता का आयोजन और गांव को विकसित बनाकर भारत को श्रेष्ठ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किया जा रहा है।
पूरे गांव और क्षेत्र में गर्व का माहौल
युवा मुट्ठी संगठन के इस ऐतिहासिक सफलता से गांव के वरिष्ठजनों ने संगठन की मुक्तकंठ से सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि युवा मुट्ठी के इन प्रयासों ने यह साबित कर दिया है कि यदि गांव की युवा शक्ति संगठित हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। यह आयोजन मानवता और सामाजिक एकता की एक ऐसी प्रेरक मिसाल बन गया है, जो आने वाले वर्षों तक क्षेत्र को नई दिशा देता रहेगा।




