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अलग हटकर व्यंग्य लिखते हैं लालित्य ललित, उर्दू अनुवाद का आत्मीय लोकार्पण

नई दिल्ली। वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. लालित्य ललित के चर्चित व्यंग्य संग्रह ‘किस्से विलायती राम पांडेय के’ के उर्दू अनुवाद का आत्मीय लोकार्पण उनके निवास पर साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति में किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, व्यंग्य और आलोचना जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।

इस अवसर पर डॉ. प्रेम जन्मेजय, सुभाष चंदर, प्रो. राजेश कुमार, डॉ. राकेश पांडेय, डॉ. हरीश नवल, डॉ. संजीव कुमार, सूर्यकांत शर्मा, रणविजय राव, आशा कुंदरा, राजेश्वरी मंडोरा, सोनी लक्ष्मी राव तथा डॉ. मनोरमा सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।

व्यंग्य यात्रा के संस्थापक-संपादक डॉ. प्रेम जन्मेजय ने कहा कि वे पिछले तीन दशकों से लालित्य ललित को जानते हैं। उनकी सोच, कार्यशैली और विशिष्ट कहन ने उन्हें हमेशा प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि लालित्य ललित की लेखन क्षमता का ही परिणाम है कि उनके अनेक पात्र आज सीधे पाठकों से संवाद करते हैं।

व्यंग्य समालोचक प्रो. राजेश कुमार ने कहा कि लालित्य ललित ने अपने लेखन से अलग पहचान बनाई है। उनके व्यंग्यों का भारतीय भाषाओं में लगातार अनुवाद हो रहा है और पाठकों के बीच उन्हें व्यापक स्वीकार्यता मिल रही है।

अमेरिका से आए वरिष्ठ व्यंग्यकार डॉ. हरीश नवल ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि कभी लालित्य उनके घर घंटों साहित्य पर चर्चा करने आते थे, जबकि आज वे स्वयं उनके घर आए हैं। उन्होंने लालित्य की साफगोई, मेहनत और लेखन की सराहना करते हुए उन्हें निरंतर सृजनरत रहने का आशीर्वाद दिया।

व्यंग्यकार सुभाष चंदर ने कहा कि लालित्य ललित का लेखन हमेशा अलग पहचान रखता है। उन्होंने याद करते हुए कहा कि पहले व्यंग्य संग्रह ‘जिंदगी तेरे नाम डार्लिंग’ से शुरू हुई उनकी साहित्यिक यात्रा आज उन्हें व्यंग्य जगत के प्रमुख हस्ताक्षरों में शामिल कर चुकी है। उन्होंने कहा कि आज लालित्य ललित को नजरअंदाज करना संभव नहीं है।

इस अवसर पर सूर्यकांत शर्मा, डॉ. राकेश पांडेय और रणविजय राव ने भी लालित्य ललित को शुभकामनाएं दीं।

डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि लालित्य ललित समकालीन व्यंग्य साहित्य के अनिवार्य हस्ताक्षर बन चुके हैं। उनके व्यंग्यों का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है और विभिन्न विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य पर शोध कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनोरमा का जन्मदिन भी मनाया गया। साथ ही डॉ. संजीव कुमार की नई पुस्तक ‘ओम’ का लोकार्पण किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण कृति बताते हुए पाठकों के लिए उपयोगी बताया।

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