अल-नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने राज्य सरकार मुस्तैद, किसानों को नुकसान से बचाने किए जा रहे हैं उपाय : मंत्री श्री राम विचार नेताम
दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों पर फोकस, बीज सुरक्षा और फसल बीमा को दी जा रही प्राथमिकता
रायपुर, 23 जून 2026। अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून कमजोर रहने की आशंका के बीच छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए तेजी से कदम उठा रही है। सूखे की संभावित स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कम अवधि वाली फसलों, दलहन-तिलहन उत्पादन, बीज सुरक्षा तथा फसल बीमा को प्राथमिकता देते हुए व्यापक रणनीति तैयार की है।
यह जानकारी कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राम विचार नेताम ने केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में दी। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, संचालक कृषि श्री राहुल देव, संचालक अनुसंधान डॉ. विवेक त्रिपाठी सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री श्री नेताम ने बताया कि प्रदेश में 22 जून तक औसत वर्षा केवल 30.8 मिलीमीटर दर्ज की गई है, जो पिछले दस वर्षों के औसत से 58.3 मिलीमीटर कम है। खरीफ बोनी का लक्ष्य 48.69 लाख हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, लेकिन अब तक केवल लगभग 2 प्रतिशत क्षेत्र में ही बोनी हो सकी है। ऐसी परिस्थितियों में किसानों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए कई ठोस उपाय शुरू किए गए हैं।
कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा कम अवधि वाली धान की किस्मों को बढ़ावा देने के साथ-साथ मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, दलहनी और तिलहनी फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीजों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। उच्च भूमि वाले क्षेत्रों में अनाज के साथ दलहन और तिलहन फसलों को अंतरवर्तीय फसल के रूप में लगाने की सलाह दी जा रही है तथा किसानों को धान के स्थान पर दलहन-तिलहन की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि राज्य बीज निगम ने 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों के वितरण का लक्ष्य रखा है। सूखे की आशंका वाले 15 जिलों के लिए 1 लाख 22 हजार 95 क्विंटल बीज उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से 48 हजार 449 क्विंटल बीज किसानों तक पहुंचाए जा चुके हैं।
राज्य में रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के साथ-साथ नैनो उर्वरकों और लाभकारी फसलों के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है।
सरकार ने फसल नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बीमा कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए फसल बीमा योजनाओं को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए हैं। अल-नीनो के कम प्रभाव वाली दलहन-तिलहन और कम अवधि की फसलों को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है।
इसके अलावा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के अनुसंधान विभाग द्वारा अल-नीनो की संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की गई है, ताकि विपरीत मौसम की स्थिति में भी किसानों को राहत और कृषि उत्पादन को संरक्षण मिल सके।


