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सरकार की दुर्भावना से मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ रहा है, मौत के आंकड़े दोनों तरफ से बढ़ रहे हैं – कांग्रेस

रायपुर/18 जून 2026। छत्तीसगढ़ में मानव वन्यजीव संघर्ष और जनहानि के बढ़ते आंकड़ों को सरकार की दुर्भावना और गलत नीतियों का प्रमाण बताते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ के जंगलों में बड़े पैमाने पर हो रही कटाई, खनन और सत्ता के संरक्षण में इंसानी दखल के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास लगातार सिमट रहा है। रहने की जगह और भोजन की कमी के चलते जानवर रिहायशी इलाकों की तरफ आ रहे हैं, जिससे हिंसक घटनाओं, फसलों को नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष में भारी वृद्धि हुई है। विगत ढ़ाई वर्ष के भाजपा सरकार में जंगली जानवरों के हमले से 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है, घायलों की संख्या हजारों में है, वहीं इसी समयावधि में 9 बाघों, 38 हाथियों सहित कुल 562 जंगली जानवरों की अस्वाभाविक मौत दर्ज की गई है जिसके लिए केवल इस सरकार की कॉर्पाेरेट परस्त नीतियां जिम्मेदार है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में वनों की दुर्दशा और वन्यजीवों के हिंसक होने के प्रमुख कारण संसाधनों के असंतुलित दोहन के लिए पर्यावास का नष्ट किया जाना है। राज्य के विभिन्न हिस्सों बस्तर, सरगुजा, हसदेव अरण्य और अन्य क्षेत्रों में अंधाधुंध पेड़ कटाई और खनन परियोजनाओं से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास छिन रहा है। भोजन की तलाश में ये जानवर गांवों और खेतों की ओर रुख कर रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार ने पूरे प्रदेश में नरवा संवर्धन योजना चलाया था, विशेष तौर पर वन भूमि में जलस्रोतों के संरक्षण और संवर्धन का काम किया गया लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद से वह योजना बंद कर दिया गया, परिणाम स्वरूप जलस्रोत सूख गए। ग्रीन इंडिया मिशन, राष्ट्रीय वनीकरण कार्यक्रम, वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम और कैंपा जैसी योजना इस सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है। सरकार की उपेक्षा भीषण गर्मी और जंगलों के कुप्रबंधन के कारण ही जलस्रोत सूखे हैं, जिससे प्यास और भोजन की तलाश में वन्यजीव हिंसक हो रहे हैं। इस सरकार ने लेमरू एलिफेंट रिजर्व का काम भी रोक दिया है जिसके चलते मानव-हाथी संघर्ष तेजी से बढ़ रहा है। पिछले ढाई वर्षों में सैकड़ों लोग हाथियों के हमले का शिकार हुए हैं। तेंदुआ और भालू के हमले के हमले सिहावा, कांकेर और कोंडागांव में बढ़े हैं। धमतरी, कोरबा, और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में भालुओं और तेंदुओं के हमले लगातार हो रहे हैं। भाजपा सरकार की नीतियां जन विरोधी है, पर्यावरण विरोधी है, वन्यजीव विरोधी है।

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