12 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ बुलंद की आवाज, जेल भी गए थे स्वतंत्रता सेनानी स्व. हजारी लाल जैन

https://youtube.com/shorts/TiG7O7xc4LA?si=i2PspWwh4LZaSQXo

महात्मा गांधी की कार चलाने का मिला था सौभाग्य, श्रद्धांजलि कार्यक्रम में किया गया स्मरण
कवर्धा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था के राष्ट्रीय महासचिव श्री जितेंद्र रघुवंशी (कनखल, हरिद्वार) के मार्गदर्शन में माह जून के प्रथम रविवार को स्थानीय भारत माता चौक में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में भारत माता, वीर शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को गुलाल, पुष्प अर्पित कर दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धांजलि दी गई।
संस्था के जिला अध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार यदु ने बताया कि कबीरधाम जिले में यह सातवां श्रद्धांजलि कार्यक्रम था। इसी प्रकार देश के 22 राज्यों के विभिन्न जिलों में भी ऐसे आयोजन किए जाते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था के उपाध्यक्ष इंजीनियर एस.एस. जैन ने अपने पिताश्री एवं स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय हजारी लाल जैन को नमन करते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्व. हजारी लाल जैन का जन्म 10 जनवरी 1910 को जगदलपुर (बस्तर) में हुआ था। बचपन से ही उनके मन में देश की स्वतंत्रता के प्रति गहरी भावना थी। मात्र 12 वर्ष की आयु में अंग्रेजों के खिलाफ नारे लगाने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। बालक होने के कारण जुर्माना लगाकर रिहा कर दिया गया, लेकिन उन्होंने कभी अंग्रेजी हुकूमत के सामने घुटने नहीं टेके।
इंजी. एस.एस. जैन ने बताया कि एक बार अंग्रेजों ने उनके पिता को उल्टा लटकाकर पानी के हौज में डुबोकर प्रताड़ित किया। तब उन्होंने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए बेहोशी का नाटक किया। अंग्रेजों ने जैसे ही पैरों में बंधी रस्सी खोली, वे वहां से भाग निकले और अंग्रेज उन्हें पकड़ नहीं पाए। अपने पिता की स्मृतियों को साझा करते हुए इंजीनियर एस.एस. जैन भावुक हो गए और उनकी आंखें नम हो गईं।
उन्होंने वर्ष 1933 का उल्लेख करते हुए बताया कि महात्मा गांधी जब बिलासपुर से रायपुर पहुंचे और पंडित रविशंकर शुक्ल के निवास पर ठहरे थे, तब कंडेल असहयोग आंदोलन में शामिल होने धमतरी जाने के दौरान स्व. हजारी लाल जैन को महात्मा गांधी की कार चलाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गांधीजी के निजी सचिव श्री देसाई के निर्देश पर मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने महात्मा गांधी को धमतरी, कुरूद, खरोरा, पलारी, बलौदाबाजार, भाटापारा होते हुए बिलासपुर रेलवे स्टेशन तक कार से पहुंचाया था।
इंजी. एस.एस. जैन ने बताया कि उस कार में महात्मा गांधी के अलावा उनके निजी सचिव श्री देसाई, मीरा बेन तथा बप्पा ठाकरे भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि स्व. हजारी लाल जैन अपने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान कुल छह माह तक जेल में रहे।
स्वतंत्रता सेनानी स्व. हजारी लाल जैन के संघर्ष एवं देशभक्ति की गाथा सुनकर संस्था के सदस्यों में नई ऊर्जा का संचार हुआ। इस अवसर पर डॉ. नरेश कुमार यदु ने संस्था की ओर से इंजीनियर एस.एस. जैन का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् तथा राष्ट्रगान “जन-गण-मन” के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
इस अवसर पर डॉ. नरेश कुमार यदु, उपाध्यक्ष इंजीनियर एस.एस. जैन, सचिव नरोत्तम महोबिया, गुरुप्रसाद शर्मा, भंवरलाल लूनिया, सहसचिव सियाराम महोबिया सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था, कबीरधाम के जिला अध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार यदु ने दी।

