सूर्पणखा की नासिका छेदन से सीता हरण तक भावपूर्ण मंचन

खर-दूषण वध और जटायु-रावण युद्ध ने दर्शकों को किया रोमांचित

अमिला (मऊ)। श्री ठाकुरद्वारा रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे 208 वर्षों के ऐतिहासिक रामलीला महोत्सव में शुक्रवार की देर रात वनलीला के मार्मिक और रोमांचक प्रसंगों का मंचन किया गया। पंचवटी में सूर्पणखा के आगमन से लेकर माता सीता के हरण और जटायु के वीरतापूर्ण संघर्ष तक की लीला ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

रामलीला की शुरुआत पंचवटी में सूर्पणखा के आगमन से हुई। उसने प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण से संवाद किया। सूर्पणखा के दुर्व्यवहार पर लक्ष्मण ने उसकी नासिका छेदन कर दंडित किया। अपमानित सूर्पणखा ने खर-दूषण से शिकायत की। इसके बाद राक्षसों ने राम पर आक्रमण कर दिया, लेकिन प्रभु श्रीराम ने खर-दूषण समेत राक्षसों का संहार कर दिया।

इसके बाद रावण द्वारा माता सीता के हरण का प्रसंग मंचित किया गया। मारीच स्वर्ण मृग का रूप धारण कर पंचवटी पहुंचा। स्वर्ण मृग को देखकर माता सीता ने प्रभु श्रीराम से उसे लाने का आग्रह किया। प्रभु श्रीराम के मृग के पीछे जाने के बाद उत्पन्न परिस्थितियों का लाभ उठाकर रावण साधु का वेश धारण कर वहां पहुंचा और माता सीता का हरण कर लिया।

माता सीता को ले जाते समय पक्षीराज जटायु ने रावण का रास्ता रोक लिया। जटायु और रावण के बीच हुए युद्ध का जीवंत मंचन देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे। संघर्ष में जटायु गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में प्रभु श्रीराम को माता सीता के हरण की पूरी

रामलीला के दौरान कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय और संवादों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक मौजूद रहे।


