
40.54 लाख करोड़ की संशोधित लागत वाले 1,847 केंद्रीय परियोजनाओं की निगरानी, 165 संकेतकों से हो रहा बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन का आकलन
नई दिल्ली, 10 अगस्त 2026। देश में केंद्रीय क्षेत्र की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और डेटा आधारित बनाने की दिशा में ‘पैमाना’ (PAIMANA) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा विकसित यह वेब आधारित प्लेटफॉर्म 150 करोड़ रुपए या उससे अधिक लागत वाली केंद्रीय क्षेत्र की चालू बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी करता है।
PAIMANA यानी Project Assessment, Infrastructure Monitoring and Analytics को 25 सितंबर 2025 को लॉन्च किया गया था। इसने पूर्ववर्ती OCMS-2006 प्रणाली का स्थान लिया है। इसके माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति, लागत और विभिन्न प्रदर्शन संकेतकों की डिजिटल निगरानी की जा रही है।
1,847 परियोजनाओं पर नजर
जून 2026 तक 17 केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों की 1,847 परियोजनाएं PAIMANA के तहत निगरानी में थीं। इन परियोजनाओं की कुल संशोधित लागत 40.54 लाख करोड़ रुपए है, जबकि अब तक इनमें 21.97 लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
लगभग 709 परियोजनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति पूरी हो चुकी है। वहीं करीब 337 परियोजनाओं में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है।
परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र परियोजनाओं की संख्या के मामले में सबसे आगे है। इस क्षेत्र में 22.32 लाख करोड़ रुपए की लागत वाली 1,341 परियोजनाएं शामिल हैं।
छह प्रमुख क्षेत्रों के 165 संकेतक
PAIMANA के परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड में अब 165 प्रदर्शन संकेतक शामिल हैं। इनमें नागरिक उड्डयन, सड़क, बिजली, बंदरगाह-जहाजरानी एवं जलमार्ग, दूरसंचार और रेलवे जैसे छह प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्र शामिल हैं।
इनमें नागरिक उड्डयन के 31, सड़कों के 8, बिजली के 14, बंदरगाह-जहाजरानी एवं जलमार्ग के 62, दूरसंचार के 13 और रेलवे के 37 संकेतक शामिल हैं।
यह डैशबोर्ड केवल परियोजनाओं के उत्पादन या निर्माण की स्थिति पर केंद्रित नहीं है, बल्कि पहुंच, गुणवत्ता, वित्तीय लागत एवं राजस्व, उपयोग और वहनीयता जैसे विभिन्न आयामों के आधार पर बुनियादी ढांचे के प्रदर्शन का आकलन करता है।
769 मेगा परियोजनाएं भी निगरानी में
जून 2026 तक निगरानी में शामिल परियोजनाओं में 769 मेगा परियोजनाएं हैं, जिनमें प्रत्येक की लागत 1,000 करोड़ रुपए या उससे अधिक है। इनकी कुल लागत 30.51 लाख करोड़ रुपए है।
इसके अलावा 150 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपए के बीच लागत वाली 1,078 बड़ी परियोजनाएं भी निगरानी के दायरे में हैं, जिनकी कुल लागत 5.10 लाख करोड़ रुपए है।
सड़क परिवहन मंत्रालय के पास सबसे अधिक परियोजनाएं
मंत्रालयवार आंकड़ों के अनुसार सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास सबसे अधिक 1,022 परियोजनाएं हैं। इनकी संशोधित लागत 9.89 लाख करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय 255 परियोजनाओं के साथ दूसरे स्थान पर है, जिनकी कुल संशोधित लागत 8.69 लाख करोड़ रुपए है।
कोयला मंत्रालय 121 परियोजनाएं संचालित कर रहा है। इसके अलावा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की 105, ऊर्जा मंत्रालय की 98, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की 50 तथा जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प विभाग की 40 परियोजनाएं निगरानी में हैं।
PAIMANA-CRIP से बनेगा केंद्रीय परियोजना भंडार
8 जुलाई 2026 को PAIMANA-CRIP नामक नया मॉड्यूल लॉन्च किया गया है। इसने DPIIT के इंटीग्रेटेड प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग पोर्टल (IPMP) का स्थान लिया है। इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का केंद्रीय रिपॉजिटरी विकसित करना है।
20 से अधिक मंत्रालय, विभाग एवं कार्यान्वयन एजेंसियां डेटा एंट्री अथवा API के माध्यम से परियोजनाओं की जानकारी नियमित रूप से अपडेट कर रही हैं। वर्तमान में 60 प्रतिशत से अधिक परियोजनाओं का डेटा संबंधित मंत्रालयों एवं विभागों के MIS अथवा वेब प्लेटफॉर्म से API के जरिए स्वतः अपडेट हो रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही को मिलेगा बढ़ावा
PAIMANA का परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड 16 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों को डेटा आधारित विश्लेषण की सुविधा उपलब्ध कराना है।
केंद्र सरकार के अनुसार PAIMANA और इसका परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की निगरानी को मजबूत करने के साथ पारदर्शिता, दक्षता, जवाबदेही और साक्ष्य आधारित नीति-निर्माण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।



