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नशा मुक्ति अभियान में पत्रकारिता की भूमिका निर्णायक, कुरीतियों को उजागर कर युवाओं को दें सकारात्मक दिशा : मधुकर द्विवेदी

मनेंद्रगढ़ में पीआईबी रायपुर द्वारा आयोजित ‘वार्तालाप’ कार्यशाला संपन्न

मनेंद्रगढ़, 9 अगस्त। वरिष्ठ पत्रकार मधुकर द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता का मूल दायित्व केवल घटनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि समाज के सामने सही तथ्य रखना, जनहित के मुद्दों को आवाज देना और व्यवस्था को उसके दायित्वों के प्रति जवाबदेह बनाना है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति जैसे गंभीर सामाजिक विषय पर पत्रकारिता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। मीडिया को नशे से जुड़ी कुरीतियों और गलत गतिविधियों को उजागर करने के साथ-साथ युवाओं के सामने सकारात्मक विकल्प, प्रेरणादायक उदाहरण और सही दिशा भी प्रस्तुत करनी चाहिए।

भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), रायपुर द्वारा रविवार को मनेंद्रगढ़ में पत्रकारों के लिए आयोजित एक दिवसीय क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला-सह-संवाद कार्यक्रम ‘वार्तालाप’ में श्री द्विवेदी ने पत्रकारिता की सामाजिक जिम्मेदारी और नशा मुक्ति अभियान में मीडिया की भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। कार्यशाला का मुख्य विषय ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत–संकल्प अभियान’ था।

श्री द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारिता की वास्तविक शक्ति उसके शब्दों, तथ्यों और जनविश्वास में निहित है। एक पत्रकार की कलम केवल समाचार नहीं लिखती, बल्कि जनमत का निर्माण करती है, समाज में चेतना पैदा करती है और आवश्यकता पड़ने पर सत्ता एवं व्यवस्था से सवाल भी करती है। उन्होंने कहा कि जब समाज की विभिन्न संस्थाएं अपने दायित्वों का निर्वहन अपेक्षित रूप से नहीं कर पा रही हों, तब पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। पत्रकार के पास समाज के सामने सच रखने और जनहित के प्रश्नों को प्रभावी ढंग से उठाने की विशेष शक्ति है।

पत्रकारिता की प्रभावशीलता को रेखांकित करते हुए श्री द्विवेदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी और ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि निर्भीक, तथ्यपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता सत्ता के सर्वोच्च स्तर तक को प्रभावित कर सकती है। यदि पत्रकारिता किसी जनहित के मुद्दे को पूरी प्रतिबद्धता और दृढ़ता के साथ उठाती है, तो उसकी आवाज दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठे व्यक्ति तक भी पहुंच सकती है और उसे जवाबदेह बनाने की क्षमता रखती है।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को केवल समाचार को प्रमुखता दिलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाज के उन मुद्दों को सामने लाना भी पत्रकारिता का दायित्व है, जिन पर व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है। नशे की समस्या को इसी दृष्टि से देखने की आवश्यकता है। यह केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि नशा मुक्ति की शुरुआत स्वयं से होनी चाहिए और इसके संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।

श्री द्विवेदी ने कहा कि नशा मुक्ति अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम या समाचार की विषय-वस्तु मानने के बजाय इसे व्यापक सामाजिक आंदोलन के रूप में देखने की आवश्यकता है। मीडिया इस आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पत्रकार नशे से जुड़ी कुरीतियों और गलत गतिविधियों को उजागर करने के साथ-साथ युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल, रोजगार, स्वयंसेवा और राष्ट्र निर्माण जैसे सकारात्मक विकल्पों से जोड़ने वाली खबरों और कहानियों को भी प्रमुखता दें।

उन्होंने कहा कि नशे के दुष्प्रभावों को लेकर समाज में निरंतर जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। इसके लिए तथ्यपरक और संवेदनशील पत्रकारिता जरूरी है। नशा मुक्ति से जुड़ी सरकारी योजनाओं, सहायता एवं पुनर्वास सुविधाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना भी मीडिया की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं के दौर में पत्रकारों को तथ्यों की पुष्टि कर ही समाचार प्रकाशित करना चाहिए, क्योंकि गलत सूचना नशा मुक्ति जैसे संवेदनशील अभियान के उद्देश्यों को प्रभावित कर सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि एक पत्रकार की कलम समाज की दिशा प्रभावित करने की क्षमता रखती है। इसलिए पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना नहीं, बल्कि ऐसी खबरों को सामने लाना भी होना चाहिए जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे युवाओं की ऊर्जा को नकारात्मक गतिविधियों से दूर रखने और उसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगाने के लिए निरंतर सकारात्मक संवाद का माध्यम बनें।

उन्होंने कहा कि नशा मुक्त भारत का निर्माण केवल प्रशासन या सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, समाज, शैक्षणिक संस्थानों, युवा संगठनों और मीडिया सहित सभी वर्गों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। इस सामूहिक प्रयास में मीडिया अपनी विश्वसनीयता, पहुंच और प्रभाव के माध्यम से निर्णायक भूमिका निभा सकता है।


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