बाढ़-अतिवृष्टि से निपटने की तैयारी तेज, NDMA-NDRF ने की समीक्षा

मानसून में संवेदनशील जिलों पर रहेगा फोकस; आपात केंद्रों, अलर्ट सिस्टम और राहत-बचाव की तैयारियों को मजबूत करने के निर्देश
रायपुर | 7 अगस्त 2026
मानसून के दौरान संभावित बाढ़, अतिवृष्टि, आकाशीय बिजली और भूस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ में तैयारियों की समीक्षा की गई। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और छत्तीसगढ़ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (CGSDMA) के अधिकारियों की संयुक्त बैठक शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने राज्य में आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मानसून की तैयारियों और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की जानकारी दी। बैठक में राज्य और जिला स्तर के आपातकालीन परिचालन केंद्रों की कार्यप्रणाली तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की समीक्षा की गई।
NDRF-SDRF और जिला प्रशासन में बेहतर तालमेल पर जोर
बैठक में आपदा की स्थिति में NDRF, SDRF और जिला प्रशासन के बीच त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। संवेदनशील जिलों में राहत एवं बचाव कार्यों को बिना देरी शुरू करने के लिए संसाधनों और मानवबल की उपलब्धता पर भी विचार किया गया।
अलर्ट सिस्टम की भी समीक्षा
अधिकारियों ने ‘सचेत’ प्लेटफॉर्म और सेल ब्रॉडकास्ट आधारित अलर्ट सिस्टम के प्रभावी उपयोग की समीक्षा की। पूर्व चेतावनी समय पर लोगों तक पहुंचाने और संभावित आपदा से पहले प्रशासन को अलर्ट करने की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
मॉक एक्सरसाइज और सामुदायिक जागरूकता पर फोकस
बैठक में मॉक एक्सरसाइज, क्षमता निर्माण, सामुदायिक जागरूकता और आपदा प्रबंधन संसाधनों की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। आगामी मानसून अवधि में संवेदनशील जिलों में बेहतर समन्वय के साथ त्वरित राहत एवं बचाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
NDMA के संयुक्त सलाहकार संजीव सही ने राज्य में चल रहे आपदा प्रबंधन कार्यों में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग की जानकारी दी। संबंधित विभागों को आपसी समन्वय बढ़ाने, पूर्व तैयारियों को मजबूत करने और आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।



