पोषण से संरक्षण तक: बच्चों के विकास में छत्तीसगढ़ बना देश का नंबर-1, कुपोषण भी तेजी से घटा

रायपुर | बच्चों के पोषण, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में लागू योजनाओं के चलते राज्य ने पोषण पखवाड़ा और राष्ट्रीय पोषण माह में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है। वहीं, 0 से 5 वर्ष के बच्चों में कुपोषण के विभिन्न संकेतकों में भी लगातार कमी दर्ज की गई है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार प्रदेश में 11,490 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। इनमें बच्चों के लिए सीखने और खेलने का बेहतर माहौल तैयार किया गया है। मनरेगा के तहत 2,337 नए आंगनबाड़ी भवनों को मंजूरी मिली है, जबकि पीएम जनमन योजना के तहत 191 नए केंद्र शुरू किए गए हैं। नियद नेल्ला नार 2.0 के अंतर्गत 10 जिलों में 12,964 आंगनबाड़ी केंद्र सेवाएं दे रहे हैं।
पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2023 से जून 2026 के बीच स्टंटिंग में 7.82%, वेस्टिंग में 4.36% और अंडरवेट में 2.76% की कमी दर्ज की गई है। बौनापन की दर 30.27% से घटकर 22.45% रह गई है।

राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रति आंगनबाड़ी गतिविधियों के आधार पर राज्य पहले स्थान पर रहा। अप्रैल 2025 के पोषण पखवाड़ा में भी प्रदेश ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया। सितंबर-अक्टूबर 2025 के पोषण माह में 71,887 गतिविधियां, जबकि अप्रैल 2026 के पोषण पखवाड़े में 34.93 लाख गतिविधियां आयोजित की गईं।
बाल संरक्षण के क्षेत्र में मिशन वात्सल्य के तहत राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है। चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त 1.65 लाख से अधिक कॉलों पर कार्रवाई की गई। दत्तक ग्रहण से लाभान्वित बच्चों की संख्या 42 से बढ़कर 234, जबकि स्पॉन्सरशिप योजना से लाभ पाने वाले बच्चों की संख्या 767 से बढ़कर 2,037 हो गई है।

बाल विवाह रोकने की दिशा में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के तहत बाल विवाह प्रतिरोध अधिकारियों की संख्या 1,382 हो गई है। इसके परिणामस्वरूप रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि आधुनिक आंगनबाड़ी व्यवस्था, पोषण सुधार, बाल संरक्षण सेवाओं के विस्तार और बाल विवाह उन्मूलन जैसे प्रयासों से छत्तीसगढ़ बच्चों के सर्वांगीण विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।

