कवर्धा में नाबालिग छात्रा के मामले में स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल: आदिवासी विकास परिषद ने SIT जांच की मांग की

कवर्धा। करीब एक माह पुराने नाबालिग छात्रा से जुड़े मामले में अब निजी आवासीय स्कूल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में आरोपी के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पुलिस जांच कर रही है। इस बीच आदिवासी विकास परिषद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने की मांग की है।
परिषद का कहना है कि जांच केवल आरोपी की भूमिका तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि छात्रा के हॉस्टल में रहने के दौरान स्कूल प्रबंधन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियों का पालन किया या नहीं।
जानकारी के अनुसार, नाबालिग छात्रा निजी आवासीय स्कूल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। घटना के बाद भी वह कई महीनों तक हॉस्टल में रही। बाद में तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे घर ले गए, जहां कुछ दिनों बाद उसने बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद संबंधित थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई और पुलिस ने जांच शुरू की।
परिषद ने उठाए कई सवाल
आदिवासी विकास परिषद ने प्रेस वार्ता में पूछा कि यदि छात्रा लंबे समय तक हॉस्टल में रह रही थी, तो उसकी स्वास्थ्य स्थिति की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई। क्या छात्राओं का समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता था? क्या वार्डन और महिला स्टाफ नियमित रूप से छात्राओं की स्थिति पर नजर रखते थे? छात्रा की तबीयत खराब होने पर तत्काल मेडिकल जांच क्यों नहीं कराई गई?
परिषद ने मांग की है कि हॉस्टल के रिकॉर्ड, सुरक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच की जाए।
स्कूल प्रबंधन ने क्या कहा
स्कूल प्रबंधन का कहना है कि यह मामला वर्तमान प्राचार्य के कार्यकाल से पहले का है। उनके अनुसार, छात्रा को परिजन अपने साथ ले गए थे और बाद में उसकी तबीयत खराब होने की जानकारी मिली। मेडिकल जांच नहीं कराए जाने के सवाल पर प्रबंधन ने कहा कि इसकी जानकारी तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों से ली जाएगी।
आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी विकास परिषद ने कहा है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो संगठन व्यापक आंदोलन करेगा।
फिलहाल आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं, स्कूल प्रबंधन की ओर से किसी प्रकार की लापरवाही अभी तक जांच में सिद्ध नहीं हुई है। परिषद ने केवल स्कूल की भूमिका और निगरानी व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है।

