पेसा और वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर: जल, जंगल और जमीन के बेहतर प्रबंधन के लिए मुख्य सचिव ने दिए निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन के संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करने तथा वनवासियों के अधिकारों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में पेसा (PESA) एवं वन अधिकार अधिनियम (FRA) टास्क फोर्स समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव विकासशील ने की।
बैठक में मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी समन्वय करते हुए वनवासियों के हित में योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सभी पात्र हितग्राहियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत समयबद्ध तरीके से वन संसाधन अधिकार पत्र उपलब्ध कराए जाएं।
लंबित दावों और अधिकार पत्रों की हुई समीक्षा
बैठक में वन अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त, निराकृत एवं लंबित दावों की समीक्षा की गई। साथ ही सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े अधिकारों की मान्यता और वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बैठक में छत्तीसगढ़ पेसा नियमों के क्रियान्वयन की वर्तमान स्थिति का प्रस्तुतिकरण दिया। वहीं आदिम जाति तथा अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम के तहत किए जा रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके वैधानिक अधिकारों का पूरा लाभ मिलना चाहिए। इसके लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पाण्डेय, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिलों के कलेक्टर और संबंधित अधिकारी भी बैठक से जुड़े।


