भोरमदेव पदयात्रा में जिला प्रेस क्लब कवर्धा ने लगाया सेवा भंडारा, हजारों श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे पत्रकार

कवर्धा। आस्था, सेवा और सामाजिक सरोकार का अनूठा संगम उस समय देखने को मिला, जब भोरमदेव पदयात्रा के दौरान प्रेस क्लब कवर्धा ने पदयात्रियों की सुविधा के लिए हर वर्ष की भांति सेवा भंडारे का आयोजन किया।

इस सेवा शिविर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को भोजन और शीतल पेयजल उपलब्ध कराया गया। दिनभर लगातार चलने वाले भंडारे में दूर-दराज से आए पदयात्रियों ने प्रसाद ग्रहण किया और जिला प्रेस क्लब की इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की।

भोरमदेव धाम की ओर बढ़ रहे श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रेस क्लब कवर्धा के सदस्यों ने स्वयं व्यवस्थाओं की कमान संभाली। नास्ता,चाय वितरण से लेकर पेयजल उपलब्ध कराने तक सभी व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित ढंग से संचालित की गईं।

सेवा शिविर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया, जिससे उन्हें यात्रा के दौरान राहत और ऊर्जा मिली।

इस अवसर पर जिला प्रेस क्लब कवर्धा के अध्यक्ष प्रकाश वर्मा के नेतृत्व में क्लब के सदस्य पूरे समय सेवा कार्यों में सक्रिय रहे। कार्यक्रम में डी.एन. योगी, विजय धृतलहरे,यशवंत ठाकुर, देवेंद्र चंद्रवंशी, श्याम टंडन, ईश्वर कुंभकार,पप्पू कुरैशी, शत्रुहन मानिकपुरी और जल्लू साहू सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर नास्ता चाय वितरण, पेयजल व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखा।

प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकारिता केवल समाचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी संस्था का दायित्व है। सामाजिक, धार्मिक और जनहित के आयोजनों में सेवा कार्य करना प्रेस क्लब की परंपरा रही है और भविष्य में भी इस प्रकार के जनसेवा कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।

भंडारे में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रेस क्लब कवर्धा की इस सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि लंबी पदयात्रा के दौरान भोजन और पेयजल जैसी सुविधाएं मिलना बेहद राहतभरा अनुभव रहा। उन्होंने सेवा कार्य में जुटे सभी पत्रकारों एवं क्लब के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

भोरमदेव पदयात्रा के दौरान आयोजित यह सेवा भंडारा सामाजिक सहभागिता और जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया, जिसमें पत्रकारों ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए आस्था के इस महापर्व को और अधिक सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।




