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मैनपाट में नाशपाती की मिठास, बागवानी से बदली किसान की तकदीर

रायपुर, 15 जुलाई। छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं, बल्कि एग्री-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) के नए केंद्र के रूप में भी पहचान बना रहा है। यहां की अनुकूल जलवायु और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं से किसान पारंपरिक खेती छोड़ फलोद्यान अपनाकर बेहतर आमदनी अर्जित कर रहे हैं। मैनपाट के ग्राम बारिमा निवासी प्रगतिशील किसान मनोज यादव इसकी मिसाल बनकर उभरे हैं।

बंजर जमीन पर तैयार किया नाशपाती का बाग

मनोज यादव ने वर्ष 2017-18 में कमलेश्वरपुर स्थित शासकीय उद्यान रोपणी से नाशपाती के पौधे प्राप्त कर अपनी आधा हेक्टेयर पठारी और खाली पड़ी जमीन पर लगभग 200 पौधे लगाए। प्राकृतिक कारणों से कुछ पौधे नष्ट हो गए, लेकिन वर्तमान में उनके बाग में 170 फलदार पेड़ हैं। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन देकर बागवानी को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मौसम की मार के बावजूद डेढ़ लाख की कमाई

इस वर्ष ओलावृष्टि और बाजार में बिक्री में देरी के बावजूद मनोज यादव के बाग से करीब ढाई पिकअप (लगभग 260 कैरेट) नाशपाती का उत्पादन हुआ। थोक बाजार में 500 रुपये प्रति कैरेट की दर से बिक्री कर लगभग 1.30 लाख रुपये की आय हुई। वहीं पर्यटकों को सीधे ताजी नाशपाती बेचकर 25 से 30 हजार रुपये अतिरिक्त मिले। इस तरह उन्हें इस सीजन में करीब 1.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। पिछले वर्ष अनुकूल मौसम में इसी बाग से उन्हें 2.5 से 3 लाख रुपये तक की आय हुई थी।

एग्री-टूरिज्म का नया आकर्षण बना बाग

कुदारीडीह स्थित यह नाशपाती बाग अब पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। लालमाटी क्षेत्र के खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के बीच रोजाना 100 से 250 पर्यटक यहां पहुंचते हैं। पर्यटक 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदने के साथ-साथ स्वयं पेड़ों से फल तोड़ने का आनंद भी लेते हैं। इससे किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं तक अपनी उपज पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

किसानों और युवाओं के लिए प्रेरणा

मनोज यादव ने क्षेत्र के किसानों और युवाओं से खाली पड़ी भूमि पर नाशपाती, लीची सहित अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाने की अपील की है। उनका कहना है कि कम भूमि में भी बागवानी से अधिक लाभ कमाया जा सकता है और पर्यटन क्षेत्रों के निकट होने से सीधे ग्राहकों को बिक्री कर अतिरिक्त आय प्राप्त की जा सकती है।

जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में फलोद्यान विकास, आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास कर रहे हैं। मनोज यादव की सफलता इस बात का उदाहरण है कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन और मेहनत के बल पर बागवानी को लाभदायक व्यवसाय बनाया जा सकता है।

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