किताबें और यूनिफॉर्म के इंतजार में छात्र, कांग्रेस ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

वंदना राजपूत बोलीं- मोदी की गारंटी और साय सरकार की शिक्षा व्यवस्था दोनों कागजों तक सीमित
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मुख्य प्रवक्ता वंदना राजपूत ने राज्य सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्रदेश के हजारों सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार की प्रशासनिक विफलता और शिक्षा के प्रति उदासीनता का प्रमाण है।
वंदना राजपूत ने कहा कि सबसे गंभीर स्थिति बेमेतरा जिले में है, जहां उनके अनुसार अब तक किसी भी स्कूल में विद्यार्थियों को किताबें नहीं मिली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब समय पर किताबें ही उपलब्ध नहीं होंगी तो विद्यार्थी पाठ्यक्रम कैसे पूरा करेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री लगातार नई घोषणाएं और नियम बना रहे हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन केवल कागजों तक सीमित है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका विरोध अब अभिभावक भी करने लगे हैं। उन्होंने भिलाई क्षेत्र के रानीतराई में शिक्षकों की कमी के विरोध में स्कूल में ताला लगाकर प्रदर्शन किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि भाजपा सरकार मंचों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बच्चे बिना किताबों के पढ़ाई कर रहे हैं और गरीब परिवारों के बच्चे बिना यूनिफॉर्म के स्कूल जाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के दावों और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर है।
वंदना राजपूत ने सरकार से सवाल किया कि जब स्कूल खुलने की तारीख पहले से तय थी, तब किताबों और यूनिफॉर्म की व्यवस्था समय पर क्यों नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि क्या शिक्षा विभाग पूरी तरह विफल हो चुका है और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की प्राथमिकता शिक्षा नहीं, बल्कि प्रचार है। यदि सरकार शिक्षा के प्रति गंभीर होती तो प्रदेश का कोई भी बच्चा किताब और यूनिफॉर्म के बिना स्कूल जाने को मजबूर नहीं होता। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होता है, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे भी राजनीति और प्रचार का विषय बना दिया है।


