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1941 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन पर 9 माह नागपुर सेंट्रल जेल में रहे थे स्वतंत्रता सेनानी अमरदास, श्रद्धांजलि सभा में याद किया गया योगदान

1941 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन करने पर 9 माह नागपुर सेंट्रल जेल में रहे स्वतंत्रता सेनानी स्व. अमरदास

श्रद्धांजलि सभा में याद किया गया स्वतंत्रता संग्राम का संघर्ष, अगले माह झिरौनी में होगा श्रद्धांजलि कार्यक्रम

कवर्धा। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था, कबीरधाम जिला द्वारा स्थानीय शहीद पार्क (सिग्नल चौक) में मासिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर देश के अमर शहीदों एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ शहीदों की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद उपस्थित सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को गुलाल का तिलक लगाकर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार यदु ने बताया कि दिसंबर 2025 से संस्था द्वारा प्रत्येक माह श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह आठवां श्रद्धांजलि कार्यक्रम था। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग, बलिदान और संघर्ष से परिचित कराना तथा उनमें राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना है।

कार्यक्रम में संस्था के सम्माननीय सदस्य गुरुप्रसाद शर्मा ने अपने नाना एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. अमरदास के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि स्व. अमरदास का जन्म वर्ष 1906 में बंगोली-खरोरा में हुआ था। पंडित रविशंकर शुक्ल के विचारों से प्रभावित होकर वे कांग्रेस सेवा दल से जुड़े और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1932 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन करने पर स्व. अमरदास को गिरफ्तार कर रायपुर सेंट्रल जेल भेजा गया था। जेल से रिहा होने के बाद भी उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन जारी रखा। वर्ष 1941 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रदर्शन करने पर उन्हें पुनः गिरफ्तार कर नागपुर सेंट्रल जेल भेजा गया, जहां वे नौ माह तक कारावास में रहे। इस दौरान उनके हाथ और पैर में लोहे की बेड़ियां डाल दी गई थीं तथा उसी अवस्था में उनसे कठोर श्रम कराया जाता था। जेल से रिहा होने के बाद उनके हाथ-पैरों में गंभीर चोटें थीं, जिन्हें ठीक होने में काफी समय लगा।

गुरुप्रसाद शर्मा ने बताया कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा स्व. अमरदास को ताम्रपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि स्व. अमरदास के छोटे भाई को भी अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल जाना पड़ा था।

संस्था के उपाध्यक्ष इंजी. एस.एस. जैन ने कहा कि हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से देश को आजादी मिली है। इसलिए प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे और स्वतंत्रता सेनानियों के आदर्शों का अनुसरण करे।

विशेष अतिथि प्रभाकर शुक्ल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संस्था जिले की पहली ऐसी संस्था है, जो नियमित रूप से स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है। यह अभियान नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना जागृत करने का सराहनीय प्रयास है।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार यदु ने बताया कि आगामी अगस्त 2026 में कबीरधाम जिले के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. चतुरसिंह चंद्रवंशी के पैतृक गांव झिरौनी में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम का समापन वंदे मातरम् एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम्, महात्मा गांधी की जय, शहीद भगत सिंह की जय, शहीद सुखदेव की जय, शहीद राजगुरु की जय, शहीद चंद्रशेखर आजाद की जय, शहीद उधम सिंह की जय तथा शहीद अशफाक उल्ला खान की जय के नारों से पूरा वातावरण राष्ट्रभक्ति से गूंज उठा।

कार्यक्रम में डॉ. नरेश कुमार यदु, इंजी. एस.एस. जैन, सियाराम महोबिया, महेश महोबिया, गुरुप्रसाद शर्मा, प्रभाकर शुक्ला सहित संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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