G-QKE15KJ9P0 25777229988609873
ChhattisgarhINDIARaipurखास-खबर

चिंतन शिविर 3.0 से विकसित छत्तीसगढ़ को मिलेगी नई दिशा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय


सुशासन, तकनीक, कृषि, पर्यटन और विकासपरक राजनीति पर दो दिवसीय मंथन संपन्न, पिछले शिविरों के सुझावों से लागू हुए कई नवाचार

रायपुर। विष्णु देव साय ने कहा है कि चिंतन शिविर 3.0 विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय शिविर का रविवार को समापन हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों की अपेक्षाओं के अनुरूप प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। शिविर से प्राप्त सुझावों को शीघ्र ही नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो चिंतन शिविरों में मिले सुझावों को सरकार ने सफलतापूर्वक लागू किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे में तेजी आई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था मजबूत हुई है, वहीं सेवा सेतु के जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

शिविर के दूसरे दिन ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ विषय पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का प्रमुख हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अधोसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश और उत्तरदायी पर्यटन पर विशेष जोर दिया।

‘सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति’ विषय पर सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने जिला आधारित विकास मॉडल की वकालत करते हुए कहा कि प्रत्येक जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने जिला जीडीपी आधारित नियोजन, उद्यमिता, रोजगार और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा देने पर बल दिया।

समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने सुशासन, नेतृत्व विकास और प्रभावी नीति-क्रियान्वयन पर अपने विचार साझा किए। वहीं उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने संवेदनशील एवं मूल्य-आधारित नेतृत्व को जनोन्मुखी शासन की आधारशिला बताया।

शिविर में प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, ब्लॉकचेन और डेटा आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। वहीं कृषि विशेषज्ञ डॉ. रमेश चंद तथा टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने के उपाय सुझाए।

दो दिवसीय चिंतन शिविर में मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और देश के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने समूह आधारित विचार-मंथन किया। शिविर से प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार की आगामी नीतियों, प्रशासनिक सुधारों और विकास कार्यक्रमों का आधार बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि विकसित भारत-2047 के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में यह चिंतन शिविर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page